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रघुराम राजन की भारत को लेकर चेतावनी

राहुल गांधी ने मुख्यधारा की मीडिया को आइना दिखाया

भारतीय रिजर्व  बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने भारतीय अर्थव्यवस्था की बिगड़ती स्थिति पर चिंता जतायी है। उन्होंने भारत जोड़ो यात्रा में शामिल होने के दौरान खुद राहुल गांधी से यह बातें कहीं। मजेदार बात यह है कि श्री राजन का यह इंटरव्यू खुद राहुल गांधी ने ही लिया। इसके जरिए राहुल गांधी मीडिया को भी यह नमूना पेश करने  में सफल रहे कि दरअसल गंभीर विषयों पर गंभीर लोगों से सवाल कैसे किया जाता है।

आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने मिडल क्लास के हित के लिए नीतियां बनाने की वकालत की है। राहुल गांधी ने मौजूदा और भावी आर्थिक मुद्दों पर रघुराम राजन से यात्रा के बीच एक खेत में बने मकान की छत पर इंटरव्यू किया। श्री राजन ने कहा कि आगे आने वाले वक्त में अब सर्विस सेक्टर में क्रांति आएगी। उन्होंने कहा कोरोना काल में काम-धंधे बंद होने की वजह से गरीब-अमीर के बीच असमानता और बढ़ गई है। लोअर मिडल क्लास को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है, अपर मिडल क्लास को नुकसान नहीं हुआ है। सबसे गरीब को राशन मिलता है। अमीर को नुकसान नहीं हुआ है।

लोअर मिडिल क्लास की तरफ हमें देखना है, हमें नीति उनके लिए बनानी चाहिए। हम पूंजीवाद के खिलाफ नहीं हो सकते हैं। श्री राजन ने कहा कि इस साल दिक्कतें थी। ग्रोथ स्लो है, भारत का एक्सपोर्ट कम है। कमोडिटी की महंगाई है। महंगाई विकास में बाधक है। कोरोना के बाद दिक्कतें बढ़ी हैं और हमारी विकास दर को कम किया है। कोरोना महामारी से पहले भी हमारी विकास दर कम थी। हमने इसे पैदा किया है। राहुल के इस सवाल पर सभी का ध्यान गया है कि देश में चार-पांच पूंजीपति लगातार अमीर हो रहे हैं। दो भारत बन रहे हैं, एक किसानों और गरीबों का और दूसरा इन पांच-छह पूंजीपतियों का। इस बढ़ती असमानता पर हमें क्या करना चाहिए?

इसके उत्तर में रघुराम राजन ने कहा यह बहुत बढ़ी दिक्कत है। कोरोना काल में अमीर क्लास की आय बढ़ गई, क्योंकि वे घर से काम कर सकते थे, लेकिन गरीब लोगों को फैक्ट्री जाना था, वह बंद हो गई थी। फैक्ट्री बंद होने से मासिक आय बंद हो गई। इससे यह असमानता और बढ़ गई है। साथ ही उन्होंने संभावनाओँ के बारे में कहा कि दूसरी हरित क्रांति बिल्कुल हो सकती है। हमें अब नए तरीके से सोचना होगा। प्रोसेसिंग पर ध्यान देना होगा।

यहां का लेबर यूज करना चाहिए जो सस्ता है। खेत के प्रोसेसिंग यूनिट लगे, इससे एनर्जी बचेगी, बिजली डीजल की खपत कम हो जाएगी। दूसरे देशों के बारे में उन्होंने कहा कि अमेरिका में महंगाई बढ़ रही है। सेंट्रल बैंक ब्याज दरें बढ़ा रहे हैं। इससे भारत से निर्यात कम हो जाएगा। हमारे उत्पादन की गति कम हो जाएगी।

बांग्लादेश की तरक्की पर पूछे गये एक सवाल के उत्तर में उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की सबसे अहम इंडस्ट्री टैक्सटाइल हैं, कपड़े बनाते हैं और बेचते हैं। बांग्लादेश ने बड़ी इंडस्ट्री को अलाउ किया। वहां लेबर महिलाएं हैं। बड़े पैमाने पर भर्तियां कीं।

इस पर राहुल ने कहा बेल्लारी में जींस प्रोडक्शन का बड़ा सेंटर है, बड़ा काम था। वहां 4.5 लाख से ज्यादा लोग इस काम में लगे हुए थे। घरों में जींस की सिलाई होती थी, जॉब वर्क पर काम चलता था। जीएसटी नोटंबदी ने सब खत्म कर दिया। अंग्रेजों के टाइम से इंडस्ट्री है। आज वहां 50 हजार रह गए। इस पर उनकी सलाह थी कि इस सेक्टर को सस्ते कर्ज देने चाहिए। सरकारी पॉलिसी में एकरूपता रहनी चाहिए, ऐसा नहीं हो कि आज कुछ है और बाद में बदल जाए। राहुल ने पूछा कि भारत में एक भी कंपनी नहीं जो पहले छोटी थी और अब बड़ी हो गई।

यूएस में पांच-सात साल में छोटी कंपनी बड़ी हो जाती है। यह भारत में क्यों नहीं होता? इस पर उन्होंने कहा कि विकास यानी आगे बढ़ने के लिए अवसर चाहिए। जब आप आगे बढ़ना प्रारंभ करते हैं तो वहां की सरकार मदद करती हैं इससे छोटे बिजनेस बढ़ते हैं। किसानों के मुद्दे पर आरबीआई के पूर्व गवर्नर ने कहा कि यह बहुत बड़ी समस्या है, हम कहते रहते हैं कि किसान के लिए हम हैं, लेकिन एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट पॉलिसी उसके लिए नहीं है। एक्सपोर्ट इम्पोर्ट की टिकाऊ पॉलिसी होनी चाहिए। अगर दाम बहुत ज्यादा बढ़ जाते हैं तो इम्पोर्ट कर सकते हैं, एक्सपोर्ट पर रोक नहीं लगानी चाहिए, क्योंकि किसान का नुकसान होता है।

श्री राजन ने कहा कि लोग सरकारी नौकरी चाहते हैं, क्योंकि वहां जॉब सिक्योरिटी है। लेकिन सरकारी जॉब में बहुत कम लोग काम कर सकते हैं। केवल 1 फीसदी रोजगार ही मिल पाएगा। हमें प्राइवेट सेक्टर को आगे बढ़ाना होगा। प्राइवेट सेक्टर और एग्रीकल्चर में टेक्निक ले आएं तो रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। कुल मिलाकर श्री राजन वर्तमान सरकार के फैसलों से बढ़ रही परेशानियों का उल्लेख कर गये।

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