पंजाब के मंत्री की दलील से उच्च न्यायालय में असमंजस
राष्ट्रीय खबर
चंडीगढ़ः आम आदमी पार्टी के मंत्री संजीव अरोड़ा ने मंगलवार को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के समक्ष दलील दी कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा उनकी गिरफ्तारी पंजाब में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उनकी पार्टी के बीच चल रही राजनीतिक लड़ाई का हिस्सा है। मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति संजीव बेरी की खंडपीठ के समक्ष मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए अरोड़ा के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता पुनीत बाली ने कहा, यह राजनीतिक उत्पीड़न का मामला है। मैं हाल ही में पारित उन दो आदेशों का हवाला देना चाहता हूँ जहाँ अदालत ने राजनीतिक प्रतिशोध से सुरक्षा प्रदान की है। मैं उसी समानता की मांग कर रहा हूँ।
बाली का इशारा आप के उन पूर्व सांसदों (संदीप पाठक और राजिंदर गुप्ता) की ओर था जो हाल ही में भाजपा में शामिल हुए हैं और जिन्हें अदालत से सुरक्षा मिली है। अरोड़ा ने अपनी गिरफ्तारी को अवैध घोषित करने का आग्रह किया है। इस पर अदालत ने अगली सुनवाई 14 मई तय की है।
ईडी ने अरोड़ा को 9 मई को हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड द्वारा मोबाइल फोन की फर्जी खरीद और निर्यात से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया था। एजेंसी का आरोप है कि माल की वास्तविक आवाजाही के बिना ही निर्यात दिखाया गया और इसका उपयोग विदेशी मुद्रा को भारत लाने के माध्यम के रूप में किया गया। आरोप है कि कंपनी ने 2023-24 के दौरान लगभग 157.12 करोड़ रुपये के मोबाइल फोन की बिक्री दिखाई, जिसमें से 102.50 करोड़ रुपये का निर्यात यूएई की दो संस्थाओं को किया गया था।
अरोड़ा के वकील ने तर्क दिया कि पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद एफआईआर पोर्टल पर अपलोड नहीं की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा में शामिल होने वाले सांसद अशोक मित्तल के खिलाफ ईडी ने ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की। बाली ने कहा कि सारा लेन-देन चेक के माध्यम से हुआ और सीमा शुल्क की मंजूरी के साथ निर्यात किया गया था। उन्होंने ईडी की जांच को राजनीतिक रूप से प्रेरित करार देते हुए कहा कि एजेंसी अपनी ही दर्ज कराई गई एफआईआर की जांच स्वतंत्र रूप से नहीं कर सकती।