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समुद्र की गहराई से दो नये समुद्री खरपतवार मिले

  • दोनों नमूनों की डीएनए जांच हो चुकी है

  • रिमोट सबमेरिन के जरिए इन्हें देखा गया

  • उनके चिकित्सीय गुणों पर भी शोध जारी है

राष्ट्रीय खबर

रांचीः समुद्र वैज्ञानिकों ने अटलांटिक महासागर से दो नये किस्म के खर पतवारों की खोज की है। यह समुद्र में करीब एक सौ मीटर की गहराई में पाये गये हैं। आम तौर पर इतनी अधिक गहराई में ऐसे समुद्री पौधों का होना ही अपने आप में बड़ी बात है। इसलिए अब इन दो नये प्रजातियों के  बारे में और अधिक शोध का सिलसिला जारी है।

वैसे इस गहराई में खर पतवार मिलने की वजह से वैज्ञानिक मान रहे हैं कि और अधिक गहराई में भी नये किस्म के ऐसे पौधे हो सकते हैं, जिनके बारे में आधुनिक विज्ञान को अब तक जानकारी नहीं मिल पायी है। अब गहराई से इन दोनों प्रजातियों को बाहर लाने के बाद प्रयोगशाला में उनकी गहन जांच की जा रही है। इसमें से रेड अल्गा और दूसरा पाल्मारिया डेसिपियंस है। इन दो प्रजातियों का पता एडिलेड द्वीप के पास रोथेरा रिसर्च स्टेशन के वैज्ञानिकों को मिली है। इन्हें वहां नियमित तौर पर संचालित होने वाले रिमोट कंट्रोल सबमेरिन के जरिए खोजा गया है।

शोध दल में यूनिवर्सिटी ऑफ आबेरडीन के लोग भी थे। जिनका मानना है कि इससे अंटार्कटिका के रहस्यो को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी। प्रयोगशाला में इनकी डीएनए जांच से इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि पूर्व में इन प्रजातियों का पता नहीं चल पाया था। इस बारे में प्रोफसर फ्रिथजोफ कूयेपर ने जानकारी दी है। जो मानते हैं कि समुद्री पौधे ही सबसे अधिक मात्रा में कार्बन सोखते हैं। इसलिए उनके बारे में अभी और जानकारी हासिल किये जाने की जरूरत है।

इसके अलावा दुनिया में तेजी से बढ़ते भोजन संकट के बीच इन्हीं समुद्री खरपतवारों को भी वैकल्पिक भोजन के तौर पर देखा जा रहा है। जिस पर तेजी से शोध भी हो रहा है। इस प्रयास में सफलता मिलने पर दुनिया में भोजन का एक बहुत बड़ा संकट दूर हो जाएगा। ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे तथा यूनिवर्सिटी ऑफ साउम्पटन से जुड़े वैज्ञानिक बेन रोबिनसन ने कहा कि अत्यधिक ठंड के माहौल में समुद्री तल पर उगे ऐसे खरपतवार अपनी जड़ों से टूटकर और गहराई में चले जाते हैं।

ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अंटार्कटिका के विशाल बर्फखंड उनसे रगड़ाते हैं। इसलिए और अधिक गहराई में क्या कुछ है, इस पर शोध की जरूरत है। वैसे इस खोज को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अब चिकित्सा विज्ञान भी नई दवाइयों के लिए समुद्री खरपतवारों पर अध्ययन कर रहा है। कई बीमारियों के ईलाज में काम आने वाली दवाओं का असर कम होने की वजह से नये दवा की खोज की जा रही है।

इसमें समुद्री जीवन नया इलाका है। इनमें पहले से ही एंटीमाइक्रोवायल तथा एंटी कैंसर तत्व मौजूद पाये गये हैं। इसलिए इन दो नई प्रजातियों के ऐसे गुणों की भी सुक्ष्मता के साथ जांच की जा रही है। यह शोध इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अब तक चिकित्सा के लिहाज से इस दिशा में ज्यादा शोध ऩहीं हो पाया है। कुछ चिकित्सा वैज्ञानिक मानते हैं कि समुद्री पौधों में मलेरिया और कैंसर के अलावा कई किस्म के संक्रमण की रोकथाम के गुण प्राकृतिक तौर पर मौजूद होते हैं।