नाराज विधायकों ने अब्दुल्ला के सामने अपनी मांग रखी
आधिकारिक आवास पर हुई मुलाकात
कई नाराज विधायक इस दल में थे
मंत्रियों के विभागों से भी नाराजगी
राष्ट्रीय खबर
श्रीनगर: नेशनल कांफ्रेंस के भीतर जारी अंदरूनी सियासी घमासान और असंतोष की परतें अब खुलकर सामने आने लगी हैं। सत्ताधारी पार्टी के भीतर बढ़ते राजनीतिक तूफान के बीच, असंतुष्ट विधायकों का एक प्रमुख प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार, 6 नवंबर को श्रीनगर स्थित मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के आधिकारिक आवास पर पहुंचा।
इस प्रतिनिधिमंडल का मुख्य उद्देश्य पार्टी आलाकमान से मुलाकात कर अपनी लंबे समय से चली आ रही गंभीर शिकायतों और प्रमुख मांगों को सीधे तौर पर उनके समक्ष रखना था। नेशनल कांफ्रेंस के बेहद वरिष्ठ नेता और छह बार के विधायक मुबारक गुल के नेतृत्व में पहुंचे इस असंतुष्ट दल में कई अन्य प्रभावशाल विधायक शामिल थे, जिनमें अब्दुल मजीद लारमी, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति हसनैन मसूदी, नजीर अहमद गुरेजी, कैसर जमशेद लोन और पीरजादा फारूक शाह प्रमुख रहे।
प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, असंतुष्ट विधायकों ने मुख्यमंत्री और पार्टी आलाकमान के सामने स्पष्ट रूप से अपनी मांगों की एक विस्तृत सूची सौंपी। इस सूची में सबसे प्रमुख और कड़ी मांग उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी को पद से हटाने अथवा कम से कम उनसे सड़क एवं भवन (R&B) जैसे महत्वपूर्ण विभाग का प्रभार वापस लेने से जुड़ी है।
इसके अलावा, विधायकों ने मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार नासिर असलम वानी को उनके पद से हटाने और नेशनल कांफ्रेंस के सांसद शम्मी ओबेरॉय द्वारा पार्टी के दैनिक आंतरिक मामलों में किए जा रहे कथित हस्तक्षेप पर तुरंत रोक लगाने का कड़ा आग्रह किया है। साथ ही, विधायकों ने यह मांग भी उठाई कि मंत्रिपरिषद में दो साल का कार्यकाल पूरा कर चुके मंत्रियों को तुरंत कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखाया जाए।
इस बड़े राजनीतिक असंतोष की पटकथा हाल ही में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा किए गए कैबिनेट फेरबदल के बाद लिखी गई थी। वरिष्ठ नेता मुबारक गुल ने संवाददाताओं से अपनी गहरी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि वे अब तक मंत्रियों के 20 शपथ ग्रहण समारोहों के गवाह बन चुके हैं, लेकिन पार्टी में लगातार वरिष्ठता के बावजूद उन्हें हर बार मंत्रिमंडल से बाहर रखा गया।
दूसरी ओर, NC के एक अन्य विधायक अब्दुल मजीद लारमी मीडियाकर्मियों के सामने अपने विचार व्यक्त करते समय पूरी तरह भावुक हो गए। उन्होंने पार्टी के प्रति अपनी अटूट व लंबे समय की निष्ठा तथा इसके बावजूद शीर्ष आलाकमान द्वारा लगातार की जा रही अनदेखी पर अपना गहरा दुख जताया। अब इस उच्चस्तरीय बैठक का अंतिम परिणाम ही यह तय करेगा कि नेशनल कांफ्रेंस का शीर्ष नेतृत्व इस अंदरूनी असंतोष को जम्मू-कश्मीर में अपनी सत्ता के अस्तित्व के लिए एक बड़े खतरे के रूप में देखता है या फिर इसे नेताओं की महज एक क्षणिक नाराजगी मानकर टाल देता है।