एमआईएल के कार्यकारी निदेशक गिरफ्तार
भाई और व्यापारी भी जेल गये
तलाशी में करोड़ से ज्यादा जब्त
सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है यह
राष्ट्रीय खबर
मुंबईः पुणे की विशेष सीबीआई अदालत ने रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा निर्माण कंपनी म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार बी.आर., उनके भाई हर्षवर्धन बी.आर. और कथित रिश्वत देने वाले व्यवसायी आशीष कंसल को करोड़ों रुपये के रिश्वत मामले में 19 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
सीबीआई के जांच अधिकारियों ने अदालत को बताया कि वे इस मामले में अन्य सरकारी कर्मचारियों और एक आंगड़िया (पारंपरिक कूरियर सेवा प्रदाता) की भूमिका की भी जांच करेंगे, जो इस मामले में सह-आरोपी है। सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने सरकारी कार्यों में निजी ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए रिश्वत लेने के आरोप में 12 अक्टूबर को यह मामला दर्ज किया था। इसके बाद, सीबीआई ने कंपनी के मुख्यालय में अनिल कुमार की तैनाती से जुड़े येरवडा स्थित उनके सरकारी आवास पर तलाशी ली और 1.67 करोड़ रुपये की नकदी बरामद की।
सीबीआई ने कथित तौर पर रिश्वत देने वाले कंसल को 13 अक्टूबर को दिल्ली में गिरफ्तार किया। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड हासिल करने के बाद उसे पुणे लाया गया और यहां अदालत में पेश किया गया। जांच अधिकारियों ने कहा कि अन्य सरकारी कर्मचारियों और सह-आरोपी आंगड़िया की भूमिका की भी जांच की जानी है। जांच अधिकारी इंस्पेक्टर अविनाश गुप्ता और विशेष लोक अभियोजक अभयराज अरिकर ने इन्हीं आधारों पर आरोपियों की पुलिस हिरासत की मांग की।
अभियुक्तों की ओर से अधिवक्ता ए.बी. भुजबल और मयूर माली पेश हुए। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि कथित रिश्वत की रकम और दस्तावेज पहले ही जब्त किए जा चुके हैं, इसलिए पुलिस हिरासत की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि कंसल को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 35(3) के तहत नोटिस दिए बिना ही गिरफ्तार किया गया था।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, विशेष न्यायाधीश आर.आर. मेंढे ने टिप्पणी की कि आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप गंभीर हैं और देश की रक्षा व्यवस्था से जुड़े हैं। अदालत ने गिरफ्तारियों को सही ठहराया और आरोपियों को 19 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया।