कई में आपातकाल लागू करने का एलान
पनामा सिटीः जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणाम अब दुनिया के विभिन्न हिस्सों में इंसानी जीवन और अर्थव्यवस्था को सीधे तौर पर प्रभावित करने लगे हैं। मध्य अमेरिका के देशों में अल नीनो के प्रभाव और रिकॉर्ड तोड़ मानसूनी विफलता के कारण उत्पन्न भीषण सूखे की विकराल स्थिति ने गंभीर मानवीय संकट पैदा कर दिया है। इस पर्यावरणीय और कृषि संबंधी आपदा के मद्देनजर मध्य अमेरिका के कई प्रमुख देशों ने अपनी सीमाओं के भीतर राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया है।
पनामा ने इस गंभीर संकट के चलते आधिकारिक रूप से आपातकाल लागू किया है, और इससे पहले होंडुरास तथा अल सल्वाडोर जैसे देश भी समान कदम उठा चुके हैं। अल सल्वाडोर की सरकारों ने तो मौसम संबंधी और कृषि सूखे के मद्देनजर अपने यहाँ सर्वोच्च रेड अलर्ट घोषित कर दिया है। इस अभूतपूर्व सूखे के कारण मध्य अमेरिका के प्रसिद्ध ड्राई कॉरिडोर (शुष्क गलियारे) का एक बहुत बड़ा हिस्सा बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जहाँ पीने के पानी का भारी संकट पैदा हो गया है और ज़मीन सूखकर बंजर हो चुकी है।
इस प्राकृतिक आपदा का सबसे बुरा असर कृषि और खाद्य सुरक्षा पर पड़ा है। मक्का, बीन्स और चावल जैसी प्रमुख खाद्य फसलें बड़े पैमाने पर नष्ट हो चुकी हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में भुखमरी और गरीबी का खतरा मंडराने लगा है। इसके अलावा, जलस्तर में भारी गिरावट आने के कारण वैश्विक व्यापार की एक प्रमुख जीवन रेखा माने जाने वाले पनामा नहर से जहाजों की आवाजाही को भी कम करना पड़ा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय नौवहन और व्यापारिक आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई है। क्षेत्रीय सरकारों और संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों द्वारा प्रभावित ग्रामीण परिवारों तक पानी और आपातकालीन खाद्य सहायता पहुँचाने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।