ग्रीन कार्ड पर बाइस राज्य अदालत पहुंचे
न्यूयार्कः संयुक्त राज्य अमेरिका की घरेलू राजनीति और अप्रवासन प्रणाली में एक बार फिर तीखा कानूनी और राजनीतिक संघर्ष शुरू हो गया है। ट्रंप प्रशासन द्वारा ग्रीन कार्ड, वीजा और देश में वैध प्रवेश के नियमों से जुड़े पब्लिक चार्ज (सार्वजनिक भार) के प्रावधानों में व्यापक और कड़े बदलाव किए जाने के बाद देश का माहौल गरमा गया है। इन नई और सख्त नीतियों के विरोध में न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिटिया जेम्स के नेतृत्व में अमेरिका के 22 राज्यों और डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया के एक विशाल गठबंधन ने संघीय अदालत में मुकदमा दायर कर दिया है।
इस नए बदलाव के तहत आव्रजन अधिकारियों को यह व्यापक अधिकार मिल जाएगा कि वे किसी भी ऐसे विदेशी नागरिक के ग्रीन कार्ड या स्थायी निवास के आवेदन को खारिज कर सकें, जिसने अतीत में स्वास्थ्य सेवा, आवास, भोजन या अन्य किसी भी रूप में सरकारी सहायता या सार्वजनिक लाभ का लाभ उठाया हो। आलोचकों और मुकदमा करने वाले राज्यों का तर्क है कि यह नीति अप्रवासी परिवारों के मन में गहरा डर पैदा करती है, जिससे वे कानूनी रूप से मिलने वाली सहायता जैसे कि स्वास्थ्य बीमा या बच्चों के स्कूल के भोजन कार्यक्रमों से भी वंचित रहने को मजबूर हो जाएंगे।
इस नियम के दायरे में उन अमेरिकी नागरिकों के परिवार के सदस्य भी आ सकते हैं, जिनके बच्चे अमेरिकी नागरिक हैं लेकिन उन्होंने किसी सरकारी सहायता योजना का उपयोग किया हो। न्यूयॉर्क शहर के मेयर और अन्य स्थानीय निकायों ने भी इस प्रशासनिक कदम को मानवाधिकारों और स्थानीय अर्थव्यवस्था के खिलाफ करार देते हुए अलग से मुकदमे दर्ज किए हैं। व्हाइट हाउस का तर्क है कि इस नीति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में आने वाले नए लोग पूरी तरह से आत्म-निर्भर हों और अमेरिकी करदाताओं पर आर्थिक बोझ न बनें। बहरहाल, इस कानूनी महासंग्राम से अमेरिका की आव्रजन नीति पर एक बार फिर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।