Breaking News in Hindi

समुद्री रास्ते और तौर तरीके के तरीके की जांच अभी जारी

नंदन कानन में भारतीय संगीत सुन रहे ओरांगुटान

भुवनेश्वरः ओडिशा के बालासोर जिले के एक जंगल में पांच शिशु ओरंगुटान के मिलने के मामले की जांच अब राज्य की सीमाओं से आगे निकल चुकी है। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की टीमें सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पश्चिम बंगाल के दीघा और वहां से कोलकाता की ओर जांच को आगे बढ़ा रही हैं। यहाँ तक कि भारतीय तटरक्षक बल (कोस्ट गार्ड) भी उन संभावित जलमार्गों की जांच कर रहा है जिनके जरिए इन वन्यजीवों को अवैध रूप से भारत में लाया गया हो सकता है।

यह मामला तब प्रकाश में आया जब मंगलवार, 8 सितंबर को बालासोर जिले के बिचित्रपुर बड़ापही वन क्षेत्र में एक कैसुरीना (झऊ) के बागान में ये पाँचों छोटे जीव लावारिस हालत में मिले। चूंकि ओरंगुटान भारत के मूल निवासी नहीं हैं, बल्कि उनका प्राकृतिक आवास मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के उष्णकटिबंधीय वर्षा वन हैं, इसलिए इस वन्यजीव तस्करी ने सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया है।

इधर जब इन पांचों शिशु ओरंगुटान को रेस्क्यू किया गया था, तो वे एक-दूसरे से लिपटे हुए थे और तनाव के कारण अजीब सी आवाजें निकाल रहे थे। अधिकारियों ने तुरंत पहचान लिया कि यह इस प्रजाति के जानवरों में अत्यधिक चिंता और आघात के लक्षण हैं। उनकी सुधबुध लेने और तंत्रिका तंत्र को शांत करने के लिए भुवनेश्वर स्थित नंदकानन जूलॉजिकल पार्क के अधिकारियों ने उनके बाड़े में झूले लगवाए हैं, उन्हें खेलने के लिए सॉफ्ट टॉय दिए हैं और उनके तनाव को कम करने के लिए पृष्ठभूमि में शास्त्रीय संगीत (क्लासिकल म्यूजिक) बजाया जा रहा है। वर्तमान में इन्हें सेब की प्यूरी जैसी चीजें खिलाई जा रही हैं।

इन पांचों बच्चों में से चार की उम्र एक साल से भी कम है और वे अपनी मां के बिना मिले हैं। मां से इस तरह अचानक अलगाव इन जीवों के लिए अत्यधिक आघात का एक बड़ा कारण है। जैविक रूप से ओरंगुटान का बचपन काफी लंबा होता है, जिसमें वे अपने माता-पिता के साथ लगभग छह से सात साल का लंबा समय बिताते हैं। इस अवैध वन्यजीव व्यापार और तस्करी के अंतर्राष्ट्रीय रैकेट का पर्दाफाश करने के लिए पुलिस और वन विभाग की टीमें पूरी मुस्तैदी से जुटी हुई हैं।