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अमित शाह की साहा और देववर्मा के साथ बैठक

त्रिपुरा में चला आ रहा राजनीतिक गतिरोध समाप्त हुआ

ग्राम पंचायत चुनाव में तनाव टला

डेढ़ घंटे तक चली यह बड़ी बैठक

दो चरणों में लागू होगा समझौता

प्रशांत चक्रवर्ती

अगरतलाः नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा और टिपरा मोथा के संस्थापक प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा के बीच हुई एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक के बाद टिपरासा समझौते के क्रियान्वयन को लेकर लंबे समय से चला आ रहा गतिरोध टूटता नजर आ रहा है। सूत्रों के अनुसार, अब इस ऐतिहासिक समझौते को चरणबद्ध तरीके से लागू करने पर सहमति बन गई है।

अमित शाह के आवास पर आयोजित यह तीन पक्षीय बैठक 90 मिनट से अधिक समय तक चली, जिसमें समझौते के क्रियान्वयन की भविष्य की रणनीति पर व्यापक सहमति बनी। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, टिपरासा समझौते को दो चरणों में लागू किया जाएगा, और इसके क्रियान्वयन की प्रक्रिया इसी महीने (सितंबर) से शुरू होने की संभावना है।

इस गतिरोध के टूटने के रणनीतिक संकेत बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि समझौते के कार्यान्वयन में हो रही देरी टिपरा मोथा और त्रिपुरा में भाजपा नीत राज्य सरकार के बीच तनाव और मतभेद का मुख्य कारण बन गई थी।  नई दिल्ली बैठक का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम टिपरासा समझौते को चरणबद्ध तरीके से लागू करने पर बनी सहमति है। इस बैठक से निकलकर आ रही सबसे बड़ी खबर यह है कि टिपरासा समझौते के चरणबद्ध कार्यान्वयन पर एक सामान्य सहमति बन गई है। बहुत संभव है कि इसे दो चरणों में लागू किया जाएगा।

बैठक में चर्चा का दूसरा सबसे बड़ा मुद्दा त्रिपुरा में जनजातीय (आदिवासी) समुदाय के लोगों के लिए भूमि अधिकार की मांग था, जिसका राज्य की राजनीति पर गहरा असर पड़ सकता है। सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार ने राज्य के मौजूदा सांप्रदायिक सौहार्द को बिना प्रभावित किए जनजातीय भूमि अधिकारों की मांग को पूरा करने पर सैद्धांतिक रूप से सहमति व्यक्त की है। टिपरा मोथा की जनजातीय लोगों के लिए भूमि अधिकारों की जो सबसे बड़ी मांग थी, वह भी सुलझती दिख रही है। गृह मंत्री ने राज्य के सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाए बिना यह अधिकार प्रदान करने का आश्वासन दिया है।

यह मुद्दा राजनीतिक रूप से इसलिए भी अहम है क्योंकि टिपरा मोथा ने आगामी ग्राम पंचायत चुनावों से पहले भाजपा के साथ किसी भी चुनावी तालमेल के लिए जनजातीय भूमि अधिकारों को अपनी प्राथमिक शर्त बनाया था। इससे पहले प्रद्योत देबबर्मा ने खुले तौर पर समझौते में देरी पर असंतोष व्यक्त करते हुए राज्य सरकार पर बाधाएं उत्पन्न करने का आरोप लगाया था।

इस सहमति से पहले दोनों दल अलग-अलग चुनावी रणनीतियों पर काम कर रहे थे। टिपरा मोथा का कहना था कि जब तक केंद्र से भूमि अधिकारों पर ठोस प्रतिबद्धता नहीं मिलती, वह गठबंधन नहीं करेगी, जबकि भाजपा अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी में थी। बैठक के बाद मुख्यमंत्री माणिक साहा ने वार्ता को सार्थक और रचनात्मक बताया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस समझौते से आगामी विलेज काउंसिल चुनावों में भाजपा और टिपरा मोथा के बीच औपचारिक चुनावी गठबंधन का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।