संयुक्त राष्ट्र की ताजी रिपोर्ट में फिर से चेतावनी दोहरायी गयी
ग्लेशियरों के पिघलने का वैश्विक असर होगा
बांग्लादेश का ढाका शहर भी इसके जद में है
करोडों लोगों के घर इसकी चपेट में आ जाएंगे
राष्ट्रीय खबर
कोलकाताः संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि वैश्विक तापमान (ग्लोबल वॉर्मिंग) के कारण समुद्र का जलस्तर बढ़ने से भारत के दो प्रमुख महानगरों—कोलकाता और मुंबई—को भारी तबाही का सामना करना पड़ सकता है। इस पर्यावरणीय संकट के कारण लाखों लोगों का जीवन, आवासीय संपत्तियां, तटीय अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक विरासत गंभीर खतरे में पड़ सकती हैं।
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प्रशांत महाद्वीप के द्वीप राष्ट्र पलाउ में आयोजित 55वें पैसिफिक आइलैंड्स फोरम लीडर्स मीटिंग के दौरान संयुक्त राष्ट्र की उप-महासचिव अमीना मोहम्मद द्वारा जारी इस रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते दुष्प्रभावों पर चेतावनी दी गयी है। वैश्विक स्तर पर हिमनदों (ग्लेशियरों) और बर्फ की चादरों के पिघलने तथा समुद्र के पानी के गर्म होकर फैलने के कारण, वर्ष 2024 में समुद्र के जलस्तर में वृद्धि की वार्षिक दर अपने उच्चतम रिकॉर्ड स्तर—लगभग छह मिलीमीटर—पर पहुंच गई।
रिपोर्ट में विशेष रूप से दक्षिण एशिया के निचले डेल्टा क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा गया है, दक्षिण एशिया के निचले डेल्टा क्षेत्रों में, भारत के कोलकाता और मुंबई तथा बांग्लादेश के ढाका जैसे शहरों में, इसका सबसे बड़ा और निर्णायक प्रभाव मानव विस्थापन के रूप में सामने आएगा। इन क्षेत्रों में 1.4 करोड़ (14 मिलियन) से अधिक लोग स्थायी जलभराव और तटीय कटाव के कारण अपने घरों को खोने के सीधे जोखिम में हैं। हालांकि रिपोर्ट में इस तबाही के होने की कोई निश्चित समय सीमा तय नहीं की गई है, लेकिन खतरे को बहुत निकट बताया गया है।
न्यूयोर्क में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए संयुक्त राष्ट्र के सहायक महासचिव नवीद हनीफ ने इस मुद्दे पर जोर देते हुए कहा कि समुद्र के जलस्तर में वृद्धि तटीय समुदायों के अस्तित्व के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है क्योंकि लोग तेजी से अपनी तटीय भूमि खो रहे हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि समुद्र के जलस्तर में वृद्धि को केवल एक तटीय समस्या न मानकर एक प्रणालीगत खतरे के रूप में देखा जाना चाहिए। इसका सीधा असर आपके स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, मानवाधिकारों, पैतृक भूमि और सांस्कृतिक पहचान पर पड़ेगा।