ऑपरेशन सिंदूर के बाद उपजा था यह बयान का विवाद
मंत्री के बयान की आलोचना हुई थी
राज्य सरकार ने एसआईटी बनायी थी
उसके बाद से मामला लगातार टल रहा है
राष्ट्रीय खबर
भोपालः मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह द्वारा भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई विवादित टिप्पणी के मामले में राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि अभियोजन की मंजूरी पर जल्द निर्णय आने की संभावना है। यह सुनवाई देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष संपन्न हुई। राज्य सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने अदालत को बताया कि विशेष जांच दल ने अपनी जांच पूरी कर ली है और मामले की रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में रखी गई है, जबकि अभियोजन मंजूरी का प्रस्ताव सक्षम प्राधिकारी (राज्यपाल) को भेजा जा चुका है।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने प्रक्रियात्मक पहलुओं पर स्पष्टता मांगते हुए पूछा कि यदि सक्षम प्राधिकारी द्वारा अभियोजन की मंजूरी नहीं दी जाती है, तो एसआईटी की अगली कार्रवाई क्या होगी। अदालत में मौजूद एसआईटी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि अभियोजन की मंजूरी मिल जाती है तो संबंधित अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया जाएगा। इसके विपरीत, यदि मंजूरी खारिज कर दी जाती है, तो जांच एजेंसी को मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। शीर्ष अदालत ने इस बात को रिकॉर्ड में लेते हुए मामले की सुनवाई मंजूरी मिलने तक के लिए स्थगित कर दी।
वहीं, मंत्री विजय शाह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने अदालत को बताया कि मंत्री ने टिप्पणी करने के अगले ही दिन सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली थी। उन्होंने अनुरोध किया कि अभियोजन मंजूरी पर विचार करते समय मंत्री की इस लिखित माफी और अभ्यावेदन को भी सक्षम प्राधिकारी के समक्ष रखा जाना चाहिए। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस पर कोई भी सीधी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि यह मामला पूरी तरह से सक्षम प्राधिकारी के क्षेत्राधिकार में है।
राजनीतिक मोर्चे पर, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार पर मंत्री को बचाने का आरोप लगाया है। कांग्रेस प्रवक्ता स्वदेश शर्मा ने बयान जारी कर कहा कि आपराधिक प्रक्रियाओं से हटकर सरकार चाहती तो मंत्री को सीधे मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर सकती थी, लेकिन अदालत के कड़े रुख के बावजूद सरकार दोहरा रवैया अपना रही है। दूसरी तरफ, भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने इस पूरे कानूनी मामले पर फिलहाल आधिकारिक तौर पर टिप्पणी करने से परहेज किया है।
यह पूरा विवाद मई 2025 का है, जब ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मीडिया को जानकारी देने वाली सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर विजय शाह ने विवादित बयान दिया था। इस पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेते हुए एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद शाह ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जहां अदालत ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था।