नाइजर में देर रात लोगों ने सुने थे विस्फोट और फायरिंग की आवाज
नियामेः नाइजर की राजधानी नियामे में विद्रोही सैनिकों द्वारा शनिवार को राष्ट्रपति भवन और राष्ट्रीय प्रसारक (टेली साहेल) पर हमला करने तथा भारी गोलीबारी के बाद सत्ताधारी सैन्य जुंटा (सैन्य परिषद) ने स्थिति पर फिर से नियंत्रण पा लेने का दावा किया है। नाइजर पर पिछले तीन वर्षों से जनरल अब्दुर्रहमान तियानी के नेतृत्व वाली सैन्य जुंटा का शासन है, जो पश्चिम अफ्रीकी देश में लगभग एक दशक से जारी जिहादी हिंसा को नियंत्रित करने के लिए संघर्ष कर रही है।
नियामे के अतिसंवेदनशील इलाकों में कई घंटों तक हुई भीषण गोलीबारी और झड़पों के बाद, सैन्य जुंटा ने सरकारी टेलीविजन पर पढ़े गए एक बयान में घोषणा की कि वे धीरे-धीरे शहर के प्रमुख प्रतिष्ठानों पर नियंत्रण वापस ले रहे हैं। सुरक्षा और कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, नाइजर के प्रेसिडेंशियल गार्ड ने रूसी बलों (अफ्रीका कॉर्प्स) की सहायता से सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण एयर फोर्स बेस 101 को फिर से अपने कब्जे में ले लिया, जिसमें कुछ विद्रोही सैनिक मारे गए।
मध्यरात्रि के बाद शुरू हुई इस हिंसा के दौरान विद्रोही सैनिकों ने राष्ट्रपति भवन और राष्ट्रीय टेलीविजन स्टेशन टेली साहेल की आवाजाही को पूरी तरह बाधित कर दिया था। इसके कारण सरकारी चैनल का प्रसारण लगभग एक घंटे के लिए बंद हो गया था, जिसे बाद में सुबह 10:00 बजे के आसपास बहाल किया गया। नाइजर के रक्षा मंत्री जनरल सालिफू मोडी ने सरकारी टीवी पर बताया कि सशस्त्र बलों के विद्रोही सैनिकों के एक समूह ने नियामे की एक बैरक में कुछ जवानों को बंधक बना लिया था और संवेदनशील स्थानों पर अंधाधुंध गोलीबारी की थी। हालांकि, उन्होंने नागरिकों से शांत रहने की अपील करते हुए कहा कि सुरक्षा बलों ने त्वरित कार्रवाई कर स्थिति को संभाल लिया है।
नियामे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा परिसर के भीतर स्थित एयर बेस 101 में नाइजर में मौजूद रूसी अफ्रीका कॉर्प्स का मुख्यालय भी है। साथ ही यह एलायंस ऑफ साहेल स्टेट्स की एकीकृत सेना का कमान केंद्र भी है, जिसमें नाइजर के साथ बुरकिना फासो और माली शामिल हैं। घटना के बाद AES कन्फेडरेशन ने इसे तख्तापलट और देश को अस्थिर करने की साजिश करार दिया, जिसे सुरक्षा बलों की मुस्तैदी से नाकाम कर दिया गया।
तुर्किए के विदेश मंत्रालय और पड़ोसी देश अल्जीरिया ने इस हिंसा की निंदा करते हुए नाइजर की सरकार और शांति बहाली के प्रयासों के प्रति अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त किया है। गौरतलब है कि इस साल नियामे हवाई अड्डे को दो बार जिहादी गुटों द्वारा निशाना बनाया जा चुका है—जनवरी में इस्लामिक स्टेट इन द साहेल और जून के अंत में अल-कायदा से जुड़े संगठन जेएनआईएम द्वारा। नाइजर, माली और बुरकिना फासो तीनों ही देशों में तख्तापलट के बाद से सैन्य जुंटा का शासन है और इन सभी ने फ्रांस जैसे पारंपरिक पश्चिमी सहयोगियों से दूरी बनाकर रूस के साथ अपने रणनीतिक संबंध मजबूत किए हैं।