हिमालय के क्षेत्र में छेड़छाड़ से खतरा बढ़ा है
चीन बना रहा है बहुत ब़ड़ा डैम
यहां का पर्यावरण बिल्कुल भिन्न
तिब्बत के इलाके में छेड़छाड़ अधिक
काठमांडूः हिमालयी क्षेत्र अपनी अनिश्चित प्रकृति के लिए जाने जाते हैं, फिर भी पड़ोसी देश वहां अभूतपूर्व गति से निर्माण कार्य में जुटे हैं। हाल ही में चीन-नेपाल सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ ने इस तथ्य को रेखांकित किया है कि हिमालय में प्राकृतिक आपदाओं के खतरे लगातार बढ़ रहे हैं। यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब इस उच्च-ऊंचाई वाले क्षेत्र में बुनियादी ढांचे का विस्तार बेहद तेजी से हो रहा है।
नेपाल के इस हालिया आपदा में दोनों देशों की सीमाओं के पार 600 से अधिक लोगों की जान चली गई है और लगभग 3,000 लोग अभी भी लापता हैं। हालांकि, इस बात के सीधे संकेत नहीं मिले हैं कि यह त्रासदी सीधे तौर पर इंसानी निर्माण से जुड़ी थी, लेकिन इस तबाही ने उन सरकारों के लिए चेतावनी की घंटी बजा दी है जो हिमालय क्षेत्र में बांध, सुरंगें, राजमार्ग, रेलवे और पुल बनाने की होड़ में शामिल हैं। क्षेत्र के देश अपार जलविद्युत क्षमता और प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करने के साथ-साथ अपनी सीमाओं को सामरिक रूप से मजबूत करना चाहते हैं।
चीन इस तरह के निर्माण प्रयासों का नेतृत्व सबसे आगे बढ़कर कर रहा है। चीनी सरकार तिब्बत और उससे लगे हिमालयी सीमावर्ती क्षेत्रों को अपनी राष्ट्रीय और ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानती है। बीजिंग का उद्देश्य इस क्षेत्र को एक उच्च-ऊंचाई वाले हरित ऊर्जा केंद्र (ग्रीन एनर्जी पावरहाउस) के रूप में बदलना है। इसके तहत लगभग 168 अरब डॉलर की लागत से एक विशाल मेगा-बांध का निर्माण किया जा रहा है, जो मानव इंजीनियरिंग की सीमाओं की परीक्षा ले रहा है।
भारत का मानना है कि यह डैम उनके खिलाफ जल बम की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकता है। चीन ने इस आरोप का खंडन किया है और कहा है कि वह कम पानी वाले इलाकों तक पानी पहुंचाने और बिजली उत्पादन के लिए ऐसा कर रहा है। वैसे इस कार्रवाई का वहां के पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ रहा है, इसका कोई आकलन नहीं हुआ है।
केवल चीन ही नहीं, बल्कि भारत और नेपाल भी हाल के वर्षों में इस संवेदनशील क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा तैयार करने में लगे हैं। ये देश करोड़ों डॉलर का निवेश उन क्षेत्रों में कर रहे हैं जो भूकंप, प्राकृतिक आपदाओं और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं।