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अमेजन रक्षक आदिवासी नेता की मौत के मामले में फैसला

पेरू की अधालत में अपराधियों को लंबी कैद

बोगोटा: पेरू की एक अदालत ने वर्ष 2023 में अमेज़न वर्षावन के स्वदेशी पर्यावरण कार्यकर्ता क्विंटो इनुमा अल्वाराडो की सुपारी देकर कराई गई हत्या के मामले में चार व्यक्तियों को दोषी ठहराया है। अदालत ने सोमवार शाम को अपना निर्णय सुनाते हुए इन दोषियों को 15 से 35 साल तक की सख्त जेल की सजा से दंडित किया है।

अमेज़न क्षेत्र में स्वदेशी और पर्यावरण रक्षकों के खिलाफ होने वाली हिंसा में न्याय और जवाबदेही तय करने के संदर्भ में इस बहुचर्चित अदालती फैसले को एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा रहा है।  अदालत ने शूटर जेनिक्स सबोया सबोया और लिम्बर रियोस रुइज़ को हत्या के अपराध में 35-35 साल की अधिकतम जेल की सजा सुनाई है। वहीं, अवैध लकड़ी के कारोबारी सेगुंडो जुआन विलालोबोस गेवारा को, जिस पर इनुमा की हत्या का आदेश और सुपारी देने का आरोप था, 28 साल और 4 महीने के कारावास की सजा मिली है। इसके अलावा, हत्या की साजिश में सह-अभियुक्त के रूप में दोषी पाए गए जेर्ली सबोया सबोया को 15 साल की सजा सुनाई गई है।

50 वर्षीय किचवा समुदाय के प्रमुख नेता इनुमा को 29 नवंबर 2023 को उस समय नाव में गोली मार दी गई थी, जब वे सैन मार्टिन क्षेत्र में स्थित अपने गांव संता रोसियो दे यानायाकू लौट रहे थे। वे पर्यावरण रक्षकों के एक सम्मेलन से वापस आ रहे थे। सरकारी वकीलों के अनुसार, इनुमा द्वारा अपने समुदाय की भूमि पर जारी अवैध लकड़ी की कटाई का लगातार विरोध करने के कारण ही उनकी हत्या की साजिश रची गई थी।

तालीमा स्थित लीगल डिफेंस इंस्टीट्यूट की वकील क्रिस्टीना गवांछो ने इसे एक उदाहरणात्मक फैसला करार दिया है। उन्होंने कहा कि पेरू के न्यायिक इतिहास में यह पहला मामला है जहाँ किसी स्वदेशी पर्यावरण रक्षक की हत्या के जुर्म में दोषियों को इतनी सख्त सजा दी गई है, जो भविष्य के मामलों के लिए एक नजीर बनेगी।  फॉरेस्ट पीपुल्स प्रोग्राम के अनुसार, यह फैसला दर्शाता है कि स्वदेशी कार्यकर्ताओं की हत्या में अपराधियों का बच निकलना अनिवार्य नहीं है। इनुमा ने वर्ष 2016 से 2023 के बीच अवैध कटाई और नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ 13 शिकायतें दर्ज कराई थीं। 2021 में पेरू के न्याय मंत्रालय ने उन्हें ‘उच्च जोखिम’ श्रेणी में रखते हुए पुलिस सुरक्षा देने का आदेश भी दिया था, लेकिन संसाधनों, बजट और नौकाओं की कमी का हवाला देकर पुलिस दुर्गम नदी क्षेत्रों में गश्त करने में पूरी तरह असमर्थ रही, जिससे यह दुखद घटना घटी।