संगठन के फेरबदल के बाद मंत्रिमंडल का पुनर्गठन
कई लोगों के पास दोहरी जिम्मेदारी
कई मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड बहुत खराब
आगामी चुनाव पर भी होगा असली ध्यान
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी की नई राष्ट्रीय टीम के गठन के बाद अब ध्यान केंद्रीय मंत्रिमंडल के पुनर्गठन और विस्तार पर केंद्रित हो गया है। पार्टी में नई संगठनात्मक जिम्मेदारियां पाने वाले नेताओं और संसद का कार्यकाल पूरा कर चुके मंत्रियों की जगह नए सहयोगियों और युवा चेहरों को शामिल किया जा सकता है। संविधान के अनुच्छेद 75(1ए) के तहत मंत्रिपरिषद में अधिकतम 81 सदस्य हो सकते हैं, जबकि वर्तमान में प्रधानमंत्री सहित 69 मंत्री हैं। इस प्रकार मंत्रिमंडल में 12 सीटें खाली हैं। यह फेरबदल 2029 के लोकसभा चुनावों और आगामी राज्य विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है, ताकि कई विभागों का बोझ संभाल रहे मंत्रियों का कार्यभार भी कम किया जा सके।
पेपर लीक विवाद के चलते धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके अलावा, राज्यसभा कार्यकाल पूरा होने पर जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू भी इस्तीफा दे चुके हैं। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष बनाए गए हर्ष मल्होत्रा और उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष बने पंकज चौधरी को मंत्रिमंडल से मुक्त किया जा सकता है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को पार्टी का नया केंद्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पूरी और राज्य मंत्री बी. एल. वर्मा का राज्यसभा कार्यकाल नवंबर में समाप्त हो रहा है।
कुछ मंत्रियों को उनके प्रदर्शन के आधार पर भी हटाया जा सकता है। भाजपा आम तौर पर एक व्यक्ति, एक पद के सिद्धांत का पालन करती है। नए फेरबदल में युवाओं और महिला प्रतिनिधियों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया जा सकता है। कांग्रेस शासित हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक के अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और गुजरात से नए चेहरे शामिल किए जा सकते हैं। महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे की शिवसेना से श्रीकांत शिंदे के नाम की चर्चा है। पंजाब में आप से भाजपा में आए राघव चड्ढा गुट और संभवतः पुनर्गठित एनडीए गठबंधन के तहत शिरोमणि अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल की वापसी हो सकती है। पश्चिम बंगाल से टीएमसी के बागी गुट और तमिलनाडु तथा महाराष्ट्र के अन्य क्षेत्रीय समीकरणों को भी साधे जाने की संभावना है।