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अरुणाचल पुलिस ने 19 बच्चों को अंतरराष्ट्रीय बाल तस्करी से बचाया

धुबरी में छोटी नाव से 20 मवेशियों को बचाया गया

नामसाई में बाल तस्करी की शिकायत दर्ज थी

कई इलाकों के बच्चे इसके शिकार बने थे

ठेका विवाद में सीबीआई से मांगी स्टैटस रिपोर्ट

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: अरुणाचल प्रदेश पुलिस ने राज्य के विभिन्न हिस्सों से 19 नाबालिग बच्चों को मुक्त कराकर एक अंतरराष्ट्रीय बाल तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। नामसाई जिले की बाल कल्याण समिति की शिकायत पर 17 अगस्त को दर्ज मामले के बाद ईटानगर, पासीघाट, नाहरलागुन, मेचुका, आलो और लोंगडिंग से बच्चों को छुड़ाया गया। नामसाई के पुलिस अधीक्षक सांगे थिनले ने बताया कि अधिकांश बच्चों की उम्र 8 वर्ष से कम है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से बेहतर शिक्षा का वादा कर बच्चों को लिया गया था। पुलिस ने माता-पिता और बिचौलियों के बीच ₹10,000 से ₹50,000 तक के संदिग्ध लेनदेन का पता लगाया है। इन बच्चों से घरेलू काम और होटलों में बाल श्रम कराया जा रहा था। मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन किया गया है और 3 बिचौलियों को गिरफ्तार किया गया है।

असम के धुबरी जिले में पुलिस ने एक छोटी नाव के जरिए की जा रही मवेशियों की अवैध तस्करी को नाकाम करते हुए 20 गोजातीय पशुओं को सुरक्षित बचाया है। इस दौरान 3 तस्करों को गिरफ्तार किया गया। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने स्पष्ट किया कि मवेशी संरक्षण उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि तस्कर किसी भी रास्ते का इस्तेमाल करें, वे कानून की गिरफ्त से नहीं बच पाएंगे और राज्य में यह कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

अरुणाचल प्रदेश के तिरप जिले के न्यू पानीदुरिया क्षेत्र में असम राइफल्स और राज्य पुलिस के संयुक्त अभियान में प्रतिबंधित संगठन एनएससीएन का 31 वर्षीय कैडर वांगचन वांगसु पकड़ा गया। सुरक्षा बलों ने उसके पास से एक पिस्तौल, मैगजीन, 5 कारतूस, 5,450 नकद, 3 फर्जी पहचान पत्र, एक वोटर आईडी और फोन नंबरों की सूची बरामद की है। आरोपी को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए सौंप दिया गया है।

उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई को अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिजनों से जुड़ी कंपनियों को सरकारी ठेकों में कथित प्राथमिकता देने के आरोपों की प्रारंभिक जांच पर नई स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ को राज्य सरकार ने सूचित किया कि अदालत के आदेशानुसार सभी आवश्यक रिकॉर्ड और दस्तावेज सीबीआई को सौंप दिए गए हैं।