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पाकिस्तान के ठिकानों पर हथियार पहुंचाये गये है

मध्यपूर्व की अशांति के बीच चीन और तुर्किए के विमानों की गतिविधि तेज

इस्लामाबादः चीन और तुर्किए के भारी सैन्य परिवहन विमानों ने लगभग 60 घंटों की कम अवधि के भीतर पाकिस्तान के नूर खान और मसरूर एयरबेस पर लगातार कई फेरे लगाए हैं। जानकारों का मानना है कि इसमें ड्रोन और अन्य सैन्य साजो-सामान शामिल हो सकते हैं। इतने कम समय में उड़ानों का यह जमावड़ा किसी नियमित आवाजाही के बजाय एक समन्वित लॉजिस्टिक्स अभियान का संकेत देता है।

रावपिंडी के पास स्थित नूर खान एयरबेस पाकिस्तान के सैन्य मुख्यालय के बेहद करीब है, जबकि कराची स्थित मसरूर एयरबेस देश के सबसे बड़े एयरबेसों में से एक है, जिसकी पहुंच अरब सागर तक है। यह घटनाक्रम पाकिस्तान, तुर्किए और सऊदी अरब द्वारा मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करने के कुछ दिनों बाद सामने आया है, जो आपसी रक्षा संधि है।

हथियारों की असामान्य और तीव्र आपूर्ति श्रृंखला

चीन और तुर्किए पाकिस्तान के दो सबसे भरोसेमंद हथियार आपूर्तिकर्ता हैं। सूचना के अनुसार, पिछले साल हुए ऑपरेशन सिंदूर के संघर्ष के दौरान चीन ने पाकिस्तान को लाइव सैटेलाइट इनपुट मुहैया कराए थे और वर्तमान में पाकिस्तान के 81 प्रतिशत सैन्य उपकरण चीनी मूल के हैं। इसके अलावा, तुर्किए के बायकर और असिसगार्ड  ड्रोन ने भी उसी संघर्ष में हिस्सा लिया था।

इस पूरी गतिविधि में सबसे खास बात सप्लायरों की सूची नहीं, बल्कि आपूर्ति में दिखाई गई अत्यधिक तेजी है। कुछ महीनों में होने वाली नियमित आपूर्ति को सामान्य माना जाता है, लेकिन दो सबसे संवेदनशील एयरबेसों पर 60 घंटे के भीतर हथियारों का यह केंद्रीकृत प्रवाह किसी आपातकालीन स्थिति या युद्ध भंडार को तेजी से भरने का संकेत देता है।

विश्लेषकों का मानना है कि इसके पीछे दो मुख्य कारण हो सकते हैं। पहला यह कि बलूचिस्तान और अफगान सीमा पर हालिया आंतरिक अभियानों के दौरान पाकिस्तान ने उम्मीद से ज्यादा ड्रोन और सटीक गोला-बारूद खर्च कर दिया हो, जिससे उसके भंडार में कमी आई हो। दूसरा और अधिक गंभीर कारण यह है कि इस्लामाबाद किसी संभावित सैन्य संकट से पहले अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए हथियारों का भंडारण कर रहा है।

यह सैन्य एयरलिफ्ट ऐसे समय में हो रही है जब पाकिस्तान कूटनीतिक मोर्चे पर कई स्तरों पर घिरता नजर आ रहा है। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने जम्मू-कश्मीर की अपनी पहली यात्रा के दौरान इसे भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया, जिससे दशकों से चली आ रही अमेरिकी कूटनीतिक भाषा में बड़ा बदलाव देखा गया। इस बयान के बाद इस्लामाबाद ने तुरंत अमेरिकी चार्ज डी अफेयर्स को तलब किया। इसके साथ ही, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पिछले दो महीनों से लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जिसके कारण सुधनोटी और रावलकोट में अपने विधायी चुनाव तक स्थगित करने पड़े हैं। बलूचिस्तान में 11 अगस्त को मनाए गए स्वतंत्रता दिवस और वहां चल रहे गंभीर विद्रोह के कारण पाकिस्तानी सेना की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं।