इसरो के बारे में नई घोषणा से राजनीतिक बयानबाजी तेज
दशकों के परिश्रम पर पानी फेर रहे हैं
भारत के लिए अत्यंत खतरनाक स्थिति
इस विज्ञान में निजीकरण का लाभ क्या
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: कांग्रेस ने सोमवार को मोदी सरकार पर अंतरिक्ष क्षेत्र में आक्रामक निजीकरण एजेंडा आगे बढ़ाने का गंभीर आरोप लगाया। पार्टी ने सवाल उठाया कि निजी स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के नाम पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की भूमिका को सीमित करने का औचित्य क्या है।
कांग्रेस के महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने कहा कि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में इसरो की भविष्य की भूमिका को लेकर हालिया रिपोर्टों ने, पिछले छह दशकों में इस संस्थान द्वारा बनाई गई क्षमताओं और परिसंपत्तियों पर वैध चिंताएं पैदा कर दी हैं। रमेश ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, विक्रम साराभाई, सतीश धवन, ब्रह्म प्रकाश, यू.आर. राव, ए.पी.जे. अब्दुल कलाम और कई अन्य प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों तथा प्रौद्योगिकीविदों की दृष्टि, समर्पण और नेतृत्व के कारण पिछले छह दशकों में व्यवस्थित और कठिन परिश्रम से बनाई गई क्षमताओं और योग्यताओं को लेकर वैध चिंताएं उठी हैं।
रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार अंतरिक्ष कार्यक्रम में भी वही आक्रामक निजीकरण एजेंडा अपना रही है, जो उसने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में किया था। उन्होंने दावा किया, इसकी प्रेरणा स्पष्ट रूप से प्रधानमंत्री और उनके पीएमओ से आ रही है। रॉकेट विकास और निर्माण में इसरो की उपस्थिति को गंभीर रूप से सीमित किया जाना है और इसके उपग्रह से संबंधित अधिकांश संपत्तियों को निजी कंपनियों को सौंप दिया जाना है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि तमिलनाडु में लगभग 1,000 करोड़ रुपये के निवेश से विकसित किए जा रहे दूसरे स्पेसपोर्ट (अंतरिक्ष केंद्र) को भी एक निजी कंपनी को सौंप दिया जाएगा। उन्होंने कहा, बदलते समय को देखते हुए, आंध्र प्रदेश के ऐतिहासिक श्रीहरिकोटा स्पेसपोर्ट का भविष्य खुद भगवान भरोसे है।
रमेश ने कहा कि इसरो ने देश को बेहद गौरवान्वित किया है और इस बात का जिक्र किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद कई मौकों पर इसकी उपलब्धियों को उजागर किया है। उन्होंने कहा, अंतरिक्ष स्टार्टअप्स निश्चित रूप से प्रोत्साहन और समर्थन के पात्र हैं। लेकिन इसरो, जिसका निजी क्षेत्र के साथ लंबे समय से उत्पादक साझेदारियां रही हैं, उसे अब क्यों गला घोंटा जा रहा है और कमजोर किया जा रहा है? पहले से ही, पिछले कुछ महीनों में 100-120 प्रमुख इसरो पेशेवर नौकरी छोड़ चुके हैं।