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केंद्रीय गृहमंत्री ने सिलीगुड़ी में उच्च स्तरीय बैठक की

गोरखा समुदाय की मांगों का समाधान होगा

एक विशेष कमेटी का गठन किया जाएगा

दीर्घकालीन समस्याओं का निराकरण होगा

गोरखा संगठनों के नेताओँ से भी बात हुई

राष्ट्रीय खबर

सिलीगुड़ीः केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में सिलीगुड़ी में आयोजित एक उच्च स्तरीय त्रिपक्षीय बैठक के दौरान केंद्र सरकार ने दार्जिलिंग पहाड़ियों और उत्तर बंगाल के संलग्न क्षेत्रों में रहने वाले गोरखा समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांगों के समाधान की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि गोरखा पहचान और उनकी अन्य राजनीतिक आकांक्षाओं के लिए एक स्थायी राजनीतिक समाधान तलाशने, रूपरेखा तैयार करने और एक समझौते का मसौदा तैयार करने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया जाएगा।

दार्जिलिंग और आसपास के क्षेत्रों के गोरखा समुदाय द्वारा एक अलग राज्य के रूप में गोरखालैंड के गठन की मांग 1980 के दशक से की जा रही है। इससे पहले 1988 में दार्जिलिंग गोरखा हिल काउंसिल और 2011 में गोरखालैंड टेरिटोरियल जैसी क्षेत्रीय स्वायत्त संस्थाओं के गठन के प्रयास किए गए थे, जो वहां के लोगों की उम्मीदों पर पूरी तरह खरे नहीं उतर सके। हालिया बैठक में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि समिति का नेतृत्व पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और वर्तमान सरकारी वार्ताकार पंकज कुमार सिंह करेंगे। यह समिति सभी पक्षों से चर्चा कर अंतिम समझौते के विवरण को अंतिम रूप देगी।

सिलिगुड़ी में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में पश्चिम बंगाल के नेता और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। गृह मंत्री अमित शाह ने आश्वासन दिया कि क्षेत्र के लोगों की विशिष्ट पहचान, संवैधानिक मान्यता और अन्य सभी जायज मांगों पर संविधान के दायरे के भीतर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी घोषणा की कि केंद्र सरकार की ओर से पर्याप्त वित्तीय सहायता सुनिश्चित की जाएगी ताकि क्षेत्र के सभी लंबित मुद्दों का तेजी से समाधान किया जा सके। बैठक में गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के प्रमुख बिमल गुरुंग, रोशन गिरी और गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट के प्रमुख मान घिसिंग सहित कई प्रमुख नेता शामिल हुए, जिन्होंने संवैधानिक दायरे में रहकर समाधान खोजने की प्रक्रिया का समर्थन किया है।