जंतर मंतर में पुलिस बर्बरता के मुद्दे पर विवाद अब भी जारी
साकेत गोखले ने यह जानकारी साझा की
सुरक्षा प्रावधानों का हवाला दिया अस्पताल ने
कितने लोग घायल हुए इसे भी छिपा गया
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः पूर्व तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद साकेत गोखले ने गुरुवार को यह आरोप लगाया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान पेलेट या अन्य प्रक्षेप्य (प्रोजेक्टाइल) चोटों से पीड़ित लोगों के बारे में सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी को एम्स -दिल्ली ने व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा के प्रावधानों का हवाला देते हुए देने से इनकार कर दिया।
टीएमसी नेता ने यह भी आरोप लगाया कि मोदी सरकार प्रदर्शनकारियों को लगी इन चोटों से जुड़ी जानकारी को छिपा रही है और यह सवाल उठाया कि पीड़ितों की संख्या का खुलासा क्यों नहीं किया गया है। एक्स पर एक पोस्ट में गोखले ने बताया कि उन्होंने दिल्ली के चार केंद्रीय सरकारी अस्पतालों में आरटीआई आवेदन दायर किए थे, जिसमें अन्य विवरणों के साथ-साथ यह भी पूछा गया था कि प्रदर्शन के दौरान कितने लोगों को पेलेट गन से चोटें आईं। उन्होंने कहा कि दो अस्पतालों ने जवाब देकर कुल 10 पीड़ितों की पुष्टि की है, जबकि एम्स ने जानकारी देने से इनकार कर दिया है। एम्स की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।
एम्स के 14 अगस्त के आरटीआई जवाब के अनुसार, 20 जुलाई को उसकी कैजुअल्टी या इमरजेंसी विभाग में कुल 96 मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें से 94 मेडिको-कानूनी प्रकृति के थे और आठ मरीजों को भर्ती किया गया था। हालांकि, गोखले का दावा है कि अस्पताल ने चोटों की प्रकृति, लाए गए लोगों के विवरण, उनके मूल स्थान और क्या किसी व्यक्ति को पेलेट या प्रक्षेप्य चोटें आई थीं, इस पर जानकारी देने से इनकार कर दिया। इसके लिए सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 8(1)(जे) का हवाला दिया गया, जिसमें कहा गया कि ऐसी जानकारी के खुलासे से संबंधित व्यक्ति की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पहचान हो सकती है।
गोखले ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि आरटीआई आवेदन में केवल पेलेट गन से घायल पीड़ितों की संख्या मांगी गई थी, उनकी पहचान या व्यक्तिगत विवरण नहीं। उन्होंने कहा, यह अजीब है कि एम्स ने यह दावा करते हुए जानकारी देने से इनकार कर दिया कि ‘इससे मरीज की पहचान हो सकती है’। घायलों की संख्या बताने से किसी की पहचान कैसे उजागर हो सकती है? टीएमसी नेता ने आगे कहा कि अगर सरकार का दावा है कि प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई कानूनी थी, तो विवरण साझा करने से क्यों डर रही है?