31वीं दक्षिण क्षेत्रीय परिषद की बैठक में गृहमंत्री की राय
परिसीमन पर सभी राज्य एकमत रहे
आनुपातिक प्रतिनिधित्व कम नहीं हो
नदियों को आपस में जोड़ने की बात कही
राष्ट्रीय खबर
चेन्नईः केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को तमिलनाडु के महाबलीपुरम में आयोजित 31वीं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक की अध्यक्षता की। इस उच्च स्तरीय बैठक में देश के संघीय ढांचे, राज्यों के आपसी समन्वय और क्षेत्रीय विकास से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तार से मंथन किया गया। बैठक के दौरान मुख्य रूप से लंबे समय से चले आ रहे जल विवादों और लोकसभा सीटों के परिसीमन जैसे संवेदनशील विषयों पर दक्षिणी राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने खुलकर अपना पक्ष रखा।
जल विवादों पर केंद्रीय गृह मंत्री का रुखदेश में जल संकट और अंतर-राज्यीय जल बंटवारे पर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि राज्यों द्वारा अपने हितों की रक्षा करना गलत नहीं है, लेकिन ऐसा रुख अपनाना जिससे अन्य राज्यों को वर्षों तक पानी से वंचित रहना पड़े, कतई उचित नहीं है। उन्होंने दक्षिण भारतीय राज्यों के लिए पानी को ‘आत्मा’ करार दिया और लंबे समय से लंबित जल विवादों के स्थायी समाधान के लिए संबंधित राज्यों तथा केंद्रीय मंत्रालयों की संयुक्त बैठकों का सुझाव दिया।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नदियों का पानी सीधे समुद्र में मिल जाने से कोई वास्तविक हित नहीं सधता है। ब्रह्मपुत्र से लेकर कावेरी और गोदावरी तक की प्रमुख नदियों को आपस में जोड़ने (नदी जोड़ो परियोजना) से यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि भारत को आगामी सौ वर्षों तक जल संकट का सामना न करना पड़े। नदियों को आपस में जोड़ने से न केवल कृषि और उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि ईंधन की बचत के साथ पर्यावरण में सुधार और लागत-प्रभावी परिवहन प्रणाली भी मिलेगी।
परिसीमन और वित्तीय हिस्सेदारी पर राज्यों की चिंताएं बैठक के दौरान दक्षिणी राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने परिसीमन के मुद्दे पर अपनी कड़ी आपत्ति और चिंताएं दर्ज कराईं। कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने मांग की कि लोकसभा सीटों की कुल संख्या 543 पर ही स्थिर रखी जानी चाहिए। वहीं, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से यह स्पष्ट विधिवत आश्वासन देने की मांग की कि परिसीमन प्रक्रिया के दौरान संसद में किसी भी दक्षिणी राज्य के प्रतिनिधित्व का प्रतिशत कम नहीं होना चाहिए। इसके अलावा, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने विभाज्य कर पूल (tax devolution pool) में कर्नाटक का हिस्सा घटने से हुए भारी राजस्व नुकसान का मुद्दा उठाया। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश के विकास और राजस्व में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को हतोत्साहित या दंडित करने के बजाय आर्थिक रूप से अधिक प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने भी दो टूक कहा कि दक्षिणी राज्यों को किसी तरह के अधिमान्य उपचार की नहीं, बल्कि एक निष्पक्ष और न्यायसंगत व्यवस्था की आवश्यकता है, जो उनकी वित्तीय स्वायत्तता का पूरा सम्मान करे।