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जानलेवा खतरों से जूझ रहे हैं वहां के मछुआरे

ईरान युद्ध का असर लाल सागर तक फैलने से दूसरी परेशानी

अल-मखाः मजहर एक ऐसे समुद्र में काम करते हैं जो लंबे समय से यमन के संघर्ष का एक मुख्य मोर्चा रहा है। यमन के लाल सागर तट पर स्थित अल-मखा (जिसे मोचा भी कहा जाता है) शहर के रहने वाले इस मछुआरे को 2015 में क्षेत्र में युद्ध शुरू होने के बाद से ही अपनी आजीविका चलाने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है। ईंधन महंगा है और नाव किराए पर लेना भी आसान नहीं है।

लेकिन चालीस के दशक में अपनी उम्र पार कर चुके और अपने परिवार की एकमात्र आजीविका का जरिया बने मजहर के सामने एक बहुत बड़ी समस्या है: जब भी वे समुद्र में उतरते हैं, तो इस बात की कोई गारंटी नहीं होती कि वे सुरक्षित घर लौट पाएंगे। मजहर ने बताया, हाल ही में अल-खोखा में एक मछली पकड़ने वाली नाव पर गोलीबारी की गई, जिसमें हमने अपने दो साथियों को खो दिया। कोई नहीं जानता कि ऐसा क्यों हुआ और अधिकारियों ने भी इस घटना के कारणों की घोषणा नहीं की है।

जब से यह समुद्र एक युद्ध का मैदान बना है, तब से तटरेखा से आगे निकलना एक खतरनाक जुआ बन गया है। मजहर ऐसे कई मछुआरों को जानते हैं जो बिना किसी सुराग के लापता हो गए हैं। लेकिन जब घर में खाने के लिए कुछ नहीं बचता, तो वे हर जोखिम उठाकर समुद्र में उतरने का फैसला करते हैं।

यमन का लाल सागर तट देश के मछली पकड़ने के उद्योग का एक प्रमुख केंद्र है। युद्ध से पहले यह क्षेत्र तेल के बाद देश की निर्यात आय का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत था। एक अध्ययन के अनुसार, युद्ध के शुरुआती वर्षों से ही इस उद्योग पर बुरा असर पड़ा है और मछली के निर्यात में लगभग सत्तर प्रतिशत की गिरावट आई है। अल-मखा से लगभग 160 किलोमीटर उत्तर में यमन का मुख्य बंदरगाह होदेइदाह स्थित है, और इसके दक्षिणी मुहाने पर बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्गों में से एक को नियंत्रित करता है।

मजहर ने बताया कि अब मछुआरों को समुद्र में कड़ी सीमाओं का सामना करना पड़ता है जिन्हें वे पार नहीं कर सकते। यह स्थिति न केवल अल-मखा में, बल्कि पड़ोसी अल-खोखा जिले और लाल सागर तट के बड़े हिस्से में भी बनी हुई है। उन्होंने कहा, हम कृत्रिम चट्टानें बनाने के लिए क कबाड़ के बैरल और कारों के हिस्सों को समुद्र में डालने के वास्ते पैसे खर्च करते हैं। हालांकि, लाल सागर में जब भी कोई तनाव या वृद्धि होती है, तो हमें सैन्य कारणों से हमारी चट्टानों तक पहुंचने से रोक दिया जाता है और तट के पास ही मछली पकड़ने के लिए मजबूर होना पड़ता है।