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चायवाला, सब्जीवाला या पटरी वाला कोई नहीं देगा एमडीआर

केंद्रीय वित्त मंत्री सीतारमण ने फिर से यूपीआई पर सफाई दी

सरकार कई बार सफाई दे चुकी है

कई स्तरों पर उठा था गंभीर सवाल

अमेरिकी हित से जोड़कर देखा गया

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: संसद ने सोमवार को कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी है। इस महत्वपूर्ण विधेयक के पारित होने के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश को आश्वस्त करते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि इस नए कानून से यूपीआई पर किसी भी तरह का कोई कर नहीं लगाया जा रहा है और देश में डिजिटल भुगतान की व्यवस्था पूरी तरह से निःशुल्क बनी रहेगी।

यह विधेयक पिछले सप्ताह लोकसभा द्वारा पहले ही पारित किया जा चुका था, जिसे सोमवार को राज्यसभा में संक्षिप्त चर्चा और वित्त मंत्री के उत्तर के बाद ध्वनि मत से वापस लौटा दिया गया। चर्चा के दौरान वित्त मंत्री ने दृढ़ता से कहा कि इस विधेयक में यूपीआई पर किसी भी प्रकार के कर या ट्रांजैक्शन चार्ज (लेनदेन शुल्क) का कोई प्रस्ताव नहीं है।

संसद में अपने संबोधन के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दो टूक शब्दों में कहा, क्या उपभोक्ता कोई यूपीआई शुल्क भुगतान करेंगे? — नहीं। अपनी शुरुआत के बाद से ही यूपीआई उपभोक्ताओं के लिए हमेशा से मुफ्त रहा है और हर भारतीय भविष्य में भी बिना किसी लेनदेन शुल्क का भुगतान किए इस त्वरित डिजिटल भुगतान का लाभ उठाता रहेगा। उन्होंने विशेष रूप से यह भी स्पष्ट किया कि देश के छोटे दुकानदारों जैसे चायवाले, सब्जीवाले या किसी भी पटरी वाले (स्ट्रीट वेंडर) को मर्चेंट डिस्काउंट रेट का भुगतान नहीं करना पड़ेगा।

इस नए विधेयक में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स अधिनियम और आयकर अधिनियम के बीच की कड़ी को समाप्त करने का प्रस्ताव किया गया है। साथ ही, सरकार को यूपीआई और रुपे कार्ड के माध्यम से होने वाले लेन-देन के जीरो-एमडीआर फ्रेमवर्क में बदलाव करने के लिए कानूनी समर्थन या अधिकार प्रदान करने का प्रावधान भी किया गया है। वर्तमान नियमों के अनुसार, बैंक और पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर (भुगतान प्रणाली प्रदाता) प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से यूपीआई और रुपे डेबिट कार्ड के जरिए किए जाने वाले भुगतानों के लिए उपयोगकर्ताओं से कोई शुल्क नहीं ले सकते हैं। अब इस नए विधेयक के माध्यम से केंद्र सरकार को यह तय करने की कानूनी अनुमति मिल जाएगी कि अधिसूचना के जरिए किस इलेक्ट्रॉनिक भुगतान मोड या लेनदेन को पूरी तरह से मुफ्त रखा जाना अनिवार्य है।