भागने और बातों को घूमाने से अब काम नहीं चलेगा
शाह के अधीन है सारे विभाग
जिम्मेदारी लेने कोई आगे आये
पैलेट गन से भी युवक घायल हुए
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: संसद में जारी गतिरोध तब तक समाप्त नहीं होगा जब तक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह हालिया प्रदर्शनों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर सदन में अपना बयान नहीं देते। कांग्रेस पार्टी ने साफ कर दिया है कि जब तक यह मांग पूरी नहीं होती, संसद की कार्यवाही में बाधा का दौर यूं ही जारी रहेगा। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के अंतर्गत आते हैं।
20 जुलाई से आरंभ हुआ संसद का मानसून सत्र आगामी 13 अगस्त को संपन्न होना निर्धारित है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, संसद के दोनों सदनों में लगातार हो रही हंगामेदार बैठकों और बार-बार के स्थगन के चलते कई महत्वपूर्ण विधेयकों को अब तक सूचीबद्ध भी नहीं किया जा सका है। रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस पार्टी ने अपने सभी लोकसभा और राज्यसभा सांसदों के लिए एक सख्त व्हिप जारी किया है। इसके तहत सभी सांसदों को 10, अगस्त 11 और अगस्त 12 को सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है, क्योंकि इन तीन दिनों के दौरान कुछ बेहद महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होने की पूरी संभावना है। पार्टी ने अपने इंडिया गठबंधन के अन्य सहयोगी दलों से भी आग्रह किया है कि वे अपने सभी सांसदों की उपस्थिति इन तीनों दिनों में संसद के दोनों सदनों में सुनिश्चित करें।
दूसरी ओर, विपक्षी दल लगातार इस बात पर अड़े हुए हैं कि गृह मंत्री अमित शाह आगे आकर संसद में कथित पुलिस ज्यादतियों पर स्पष्ट बयान दें। पिछले दिनों 29 जुलाई को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने सदन में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि गृह मंत्री ने युवा प्रदर्शनकारियों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर गोलीबारी करने की अनुमति दी थी। उन्होंने तीखा प्रहार करते हुए कहा था कि सरकार ने छात्रों के खून में छर्रे उतार दिए हैं। गांधी ने यह भी दावा किया कि प्रदर्शनकारी छात्र ऐसे असहज सवाल पूछ रहे थे जिनका जवाब देने से गृह मंत्रालय बुरी तरह डर रहा है।अब सवाल पूछे जाने के बाद नरेंद्र मोदी और अमित शाह दोनों ही सदनों से लगातार गायब चल रहे है। केंद्रीय मंत्री रिजिजू को राज्यसभा के सभापति ने भी कहा था कि वह गृहमंत्री को सदन की भावना से अवगत करा दें। इसके बाद भी अमित शाह अनुपस्थित रहे। इसकी वजह से संसद के दोनों सदनों का काम लगातार बाधित हो रहा है।