पीएम पोषण योजना: हरियाणा शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला, खराब खाद्य सामग्री मिली तो सप्लायर पर गिरेगी गाज
चंडीगढ़: हरियाणा के सरकारी स्कूलों में ‘पीएम पोषण योजना’ (PM Poshan Scheme – मिड-डे मील) के अंतर्गत विद्यार्थियों को परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता को लेकर राज्य शिक्षा विभाग ने निगरानी तंत्र को अत्यंत कड़ा कर दिया है।
दाल, राजमा एवं मिर्च-मसालों की कुछ आपूर्तियों (Consignments) में कीड़े और फंगस पाए जाने की गंभीर शिकायतों के उपरांत विभाग ने स्कूल स्तर पर ही समस्त खाद्य सामग्री की भौतिक जांच (Physical Inspection) अनिवार्य घोषित कर दी है। अब किसी भी खाद्य सामग्री को बच्चों के भोजन में प्रयुक्त करने से पूर्व उसकी गुणवत्ता का मानक परीक्षण करना अनिवार्य होगा।
🏫 स्कूल मुखिया की होगी प्राथमिक जवाबदेही, संदिग्ध सामग्री मिलने पर तुरंत बदला जाएगा राशन
मौलिक शिक्षा निदेशक, हरियाणा ने समस्त जिला शिक्षा अधिकारियों को लिखित निर्देश जारी कर खाद्य सामग्री की गुणवत्ता पर सतत दृष्टि बनाए रखने को कहा है।
हरियाणा एग्रो इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन लिमिटेड की ओर से विद्यालयों को आपूर्ति की जाने वाली दालें, राजमा, मिर्च-मसाले व अन्य खाद्य सामग्री को पकाने से पूर्व संस्था प्रधान (स्कूल मुखिया) द्वारा व्यक्तिगत रूप से जांचा जाएगा। यदि किसी पैकेट में कीड़े, फंगस, नमी, दुर्गंध अथवा गुणवत्ता संबंधी कोई अन्य त्रुटि पाई जाती है, तो उसे किसी भी परिस्थिति में भोजन में सम्मिलित नहीं किया जाएगा। ऐसी घटिया सामग्री को तत्काल संबंधित सप्लायर से बदलने के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।
⚠️ कई जिलों से प्राप्त हुई थीं घटिया गुणवत्ता की शिकायतें, विभाग ने लिया त्वरित संज्ञान
शिक्षा निदेशालय को विभागीय सूत्रों एवं विभिन्न स्कूल प्रमुखों के माध्यम से शिकायतें प्राप्त हो रही थीं कि अनेक जिलों में पहुंचाई गई खाद्य सामग्री निर्धारित गुणवत्ता मानकों (Quality Standards) के अनुरूप नहीं है।
कुछ सीलबंद पैकेटों में कीड़े और फंगस मिलने की पुष्टि के बाद विभाग ने प्रकरण को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए सभी जिलों को गाइडलाइंस जारी की हैं। विभाग का स्पष्ट मत है कि पीएम पोषण योजना के तहत बच्चों को दिया जाने वाला भोजन सीधे उनके स्वास्थ्य और पोषण स्तर से जुड़ा है, अतः इसमें किसी भी स्तर पर शिथिलता क्षम्य नहीं होगी।
🍲 निर्धारित मेन्यू में शामिल हैं पौष्टिक व्यंजन, गुणवत्ता सुनिश्चित करना अनिवार्य
शासकीय विद्यालयों में पीएम पोषण योजना के तहत स्वीकृत साप्ताहिक मेन्यू के अनुसार विद्यार्थियों को दाल, चावल, हरी सब्जी और रोटी सहित विभिन्न पौष्टिक आहार परोसे जाते हैं।
सप्ताह में एक विशेष दिन खीर अथवा अन्य पौष्टिक व्यंजन भी वितरित किए जाते हैं। ऐसी स्थिति में भोजन तैयार करने हेतु उपयोग में लाई जाने वाली प्रत्येक सामग्री की ताजगी और शुद्धता अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
🔍 जिला शिक्षा अधिकारियों को नियमित निरीक्षण के निर्देश, लापरवाही पर होगी दंडात्मक कार्रवाई
जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs), जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों (DEEOs) तथा खंड शिक्षा अधिकारियों (BEOs) को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र के विद्यालयों का आकस्मिक निरीक्षण करने के स्पष्ट निर्देश प्रेषित किए गए हैं।
अधिकारियों को खाद्य सामग्री की आपूर्ति से लेकर उसके अंतिम उपयोग तक की संपूर्ण प्रक्रिया की निगरानी करने का दायित्व सौंपा गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अमानक या संदिग्ध खाद्य सामग्री किसी भी दशा में विद्यार्थियों को नहीं परोसी जाएगी तथा लापरवाही पाई जाने पर दोषी अधिकारियों व सप्लायर पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
👧 बच्चों के स्वास्थ्य से नहीं होगा कोई समझौता, सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराना प्राथमिकता
शिक्षा विभाग की इस प्रशासनिक सख्ती का मुख्य उद्देश्य पीएम पोषण योजना के अंतर्गत नामांकित प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, स्वच्छ एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है।
अब विद्यालयों में राशन की जांच केवल कागजी औपचारिकता न रहकर, भोजन पकाने से पूर्व गुणवत्ता सुनिश्चित करने की एक अनिवार्य व्यवस्था होगी।