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लोकसभा में पेश किया कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक

संसद में काम काज चालू होने के बीच नया विधेयक पेश किया गया

विदेशी धन आकर्षित करने का प्रयास

निवेशकों को कई किस्म की छूट मिलेगी

आर्थिक झटकों को कम करने की तैयारी

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने मंगलवार को लोकसभा में कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया। इस विधेयक का उद्देश्य निवेश को बढ़ावा देना, विनिर्माण क्षेत्र का समर्थन करना, कर निश्चितता प्रदान करना और आयकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026 का स्थान लेना है। यह विधेयक आयकर अधिनियम 2025, वित्त अधिनियम 2026 और भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम 2007 में संशोधन करने का प्रस्ताव करता है।

यह विधेयक बदलते भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और वैश्विक व्यापार व आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधानों के बीच लाया गया है। सरकार के अनुसार, इन संशोधनों का मकसद बाहरी आर्थिक झटकों को कम करना, घरेलू आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करना और वैश्विक परिस्थितियों से प्रभावित क्षेत्रों को सहायता प्रदान करना है, साथ ही व्यापार करने में सुगमता को बढ़ाना है।

विधेयक के मुख्य कर प्रस्तावों में पात्र अपतटीय निवेश फंडों और फंड मैनेजरों के लिए नियमों को सुसंगत बनाना शामिल है। इसके तहत वैश्विक निवेशकों को अधिक कर निश्चितता प्रदान करने के उद्देश्य से अनुपालन शर्तों को सरल किया गया है। इसके अलावा, विधेयक में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए कर प्रोत्साहन का दायरा बढ़ाने का प्रस्ताव है। इसके तहत विदेशी कंपनियों को मिलने वाली कर छूट को 2030-31 की समयसीमा से बढ़ाकर 31 मार्च 2041 तक कर दिया गया है। साथ ही, निर्दिष्ट इलेक्ट्रॉनिक सामानों की परिभाषा में लैपटॉप, टैबलेट, सर्वर और वियरेबल्स जैसी सामग्री को भी शामिल किया गया है।

एक अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव में विदेशी संस्थागत निवेशकों और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स के लिए सरकारी प्रतिभूतियों से होने वाली आय पर कर छूट देना शामिल है। वैश्विक हीरा व्यापार में भारत की स्थिति मजबूत करने के लिए, अधिसूचित विशेष क्षेत्रों के माध्यम से कच्चे हीरों की बिक्री से होने वाली आय पर 31 मार्च 2041 तक कर छूट का प्रस्ताव भी रखा गया है।

कर परिवर्तनों के अलावा, विधेयक में भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन करने का भी प्रस्ताव है, जिसके तहत केंद्र सरकार उन इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों को अधिसूचित कर सकेगी जिन पर बैंक या सिस्टम प्रदाता शुल्क नहीं ले सकेंगे। यह विधेयक संसद के माध्यम से अध्यादेश का स्थान लेगा।