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उड़ान योजना के सर्वाधिक 34 हवाई मार्ग हुए बंद

उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण विफलता की रिपोर्ट सार्वजनिक हुई

खुद पीएम मोदी ने चालू किया था

फंडिंग के बाद भी बंद करना पड़ा

संसद में इसकी जानकारी दी गयी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने वाली केंद्र सरकार की उड़ान योजना के तहत उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 34 हवाई मार्ग अपनी 3 साल की वायबिलिटी गैप फंडिंग सहायता अवधि पूरी होने से पहले ही बंद हो चुके हैं। वर्तमान में ये सभी मार्ग पूरी तरह से गैर-परिचालन स्थिति में हैं।

संसद में पेश किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान उड़ान मार्गों पर अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन न करने एयरलाइंस के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है। इस दौरान कुल 14 मामलों में एयरलाइंस की बैंक गारंटी जब्त करके उन पर जुर्माना लगाया गया। उड़ान योजना का मूल उद्देश्य देश के उन दूरदराज और वंचित क्षेत्रों को हवाई सेवा से जोड़ना है, जहां हवाई अड्डों की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। इस योजना के माध्यम से कई ऐसे हवाई अड्डों का विकास हुआ है जो अब वैकल्पिक उड़ान और मार्ग विकल्प प्रदान कर रहे हैं, जिससे इन क्षेत्रों की कनेक्टिविटी प्रभावित नहीं हुई है।

योजना की शुरुआत से अब तक कुल 679 उड़ान मार्गों को चालू किया गया है, जिनमें से वर्तमान में 348 मार्ग सक्रिय रूप से संचालित हो रहे हैं। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि बंद किए गए इन मार्गों पर उड़ान योजना के अगले चरण में फिर से विचार किया जा सकता है। इसके लिए राज्य सरकारों से आग्रह किया गया है कि वे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी की जरूरतों, विकास के लक्ष्यों और हवाई यात्रा की मांग की क्षमता के आधार पर ऐसे मार्गों को प्राथमिकता दें।

मंत्रालय ने कहा, उड़ान योजना के तहत सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने के लिए राज्य सरकारों को उच्च-क्षमता वाले हवाई अड्डों की पहचान और प्राथमिकता तय करने का जिम्मा सौंपा गया है, जबकि एयरलाइंस को मार्गों के आवंटन से पहले अपनी व्यावसायिक योजनाएं (बिजनेस प्लान) जमा करना अनिवार्य किया गया है।

हाल ही में सरकार ने उड़ान योजना के दूसरे चरण की शुरुआत की है, जिसके लिए 28,840 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। इसमें पहाड़ी, पूर्वोत्तर और आकांक्षी जिलों में 200 हेलीपोर्ट विकसित करने के लिए 3,661 करोड़ रुपये शामिल हैं। उड़ान मार्गों को वित्तीय सहायता पर निर्भर रहने के बजाय आत्मनिर्भर बनाने के लिए 5 साल तक का नया वीजीएफ तंत्र लागू किया गया है, ताकि एयरलाइंस व्यावसायिक रूप से स्थिर हो सकें और आम लोगों के लिए हवाई किराए भी किफायती बने रहें।