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पूरे इलाके में करोड़ों भुआ का आतंक

बड़कोबला गांव छोड़कर भागने को मजबूर हैं ग्रामीण

बगल में जूट के खेत इससे भरे पड़े हैं

गांव के दर्जनों लोग इससे बीमार पड़े

इसका रोआं सटने पर खुजली होती है

राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः पश्चिम बंगाल के कालना में भुआ (इल्लियों/कैटरपिलर) के भयानक प्रकोप से स्थितियां बेहद विकराल हो गई हैं। कालना के पूर्वास्थली-1 ब्लॉक स्थित श्रीरामपुर ग्राम पंचायत के बड़कोबला क्षेत्र में पिछले लगभग दो हफ्तों से यह समस्या बनी हुई है, जो अब अत्यधिक गंभीर रूप ले चुकी है। भुआ के इस भयंकर आतंक के कारण दर्जनों लोग बीमार पड़ चुके हैं और कई ग्रामीणों को अस्पताल तक ले जाना पड़ा है। हालात इतने बेकाबू हो चुके हैं कि कई परिवार अपने घरों और मवेशियों को छोड़कर अस्थायी रूप से गांव से पलायन करने पर मजबूर हो गए हैं।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर की गई जूट की खेती इस तबाही की मुख्य वजह है। पटसन के पौधे भुआ का मुख्य भोजन होते हैं। हाल ही में पटसन की कटाई के समय उचित मात्रा में कीटनाशकों का छिड़काव नहीं किया गया, और उसके बाद हुई बारिश ने इनके प्रजनन को बेहद तेज कर दिया। जब खेतों में भोजन समाप्त हो गया, तो ये सूंडियां भोजन की तलाश में सामूहिक रूप से रिहायशी इलाकों की ओर बढ़ गईं।

अब ये सूंडियां नालियों, पेड़ों की पत्तियों और खेतों से निकलकर घरों की दीवारों, खिड़कियों, रसोई के बर्तनों, खाने-पीने की चीजों और इस्तेमाल के हर सामान पर रेंग रही हैं। सबसे बड़ी समस्या इन भुआ के शरीर पर मौजूद सूक्ष्म और विषैले बाल हैं, जो हवा में उड़कर भोजन, पानी और लोगों के सांसों में घुल रहे हैं। इन बालों के संपर्क में आने से लोगों के शरीर में तेज जलन, खुजली, चकत्ते और आंखें लाल होने की समस्या हो रही है। साथ ही सांस लेने में तकलीफ, उल्टी और पेट खराब होने जैसी बीमारियां फैल रही हैं।

पिछले 10 दिनों में 40 से अधिक लोग प्राथमिक उपचार करा चुके हैं, जबकि 5 बच्चों और 2 बुजुर्गों को कालना उप-विभागीय अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। क्षेत्र के करीब 30-35 परिवारों की स्थिति सबसे खराब है, जिनके घर खेतों के बिल्कुल करीब हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि श्रीरामपुर ग्राम पंचायत को बार-बार सूचित करने के बावजूद समय पर कीटनाशकों का छिड़काव नहीं किया गया। फिलहाल पूरा क्षेत्र खौफ और अनिश्चितता के साए में जीने को मजबूर है और प्रशासन से त्वरित राहत की गुहार लगा रहा है।