अमेरिकी हमले से उपजी नाराजगी का सार्वजनिक प्रदर्शन जारी
एजेंसियां
तेहरानः तेहरान के मध्य में एक विशाल बिलबोर्ड का अनावरण किया गया है, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक ताबूत में मृत दिखाया गया है। इस घटना ने ईरान की ओर से बढ़ती आक्रामक बयानबाजी और तनाव को लेकर चिंताओं को अत्यधिक गहरा कर दिया है।
यह सार्वजनिक प्रदर्शन हाल ही में आयतुलह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार समारोहों के ठीक बाद हुआ है, जिसमें शोक मनाने वालों ने खुले तौर पर डोनाल्ड ट्रंप, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और दिवंगत अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम को जान से मारने के नारे लगाए थे। इस्लामिक रिवॉल्यूशन स्क्वायर में लगाए गए इस नए बिलबोर्ड पर अंग्रेजी में स्पष्ट रूप से वी किल ट्रंप (हम ट्रंप को मारेंगे) लिखा है, जिसे अमेरिकी नेता के खिलाफ एक सीधे और गंभीर खतरे के रूप में देखा जा रहा है।
यह उग्र बयानबाजी तेहरान और वाशिंगटन के बीच लंबे समय से चली आ रही दुश्मनी का ही एक हिस्सा है, विशेष रूप से साल 2020 में हुए उस अमेरिकी ड्रोन हमले के बाद से, जिसमें ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी की मौत हो गई थी। ईरानी अधिकारियों ने बार-बार सुलेमानी की मौत का बदला लेने की कसम खाई है, जिसमें ट्रंप की हत्या भी शामिल है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने वर्षों से चेतावनी दी है कि तेहरान लगातार ट्रंप और उनके पूर्व प्रशासन के अधिकारियों को निशाना बनाने की साजिशों पर काम कर रहा है।
इस खतरे के केंद्र में केवल डोनाल्ड ट्रंप ही नहीं हैं, बल्कि पूर्व विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ और पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन को भी अमेरिकी अधिकारियों द्वारा ईरानी हत्या की साजिशों के मुख्य लक्ष्यों के रूप में पहचाना गया है। अमेरिकी न्याय विभाग ने इससे पहले जॉन बोल्टन की हत्या की कथित योजना के सिलसिले में ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े व्यक्तियों पर गंभीर आरोप लगाए थे।
अभियोजकों के अनुसार, इस साजिश में हत्या को अंजाम देने के लिए लाखों डॉलर की पेशकश शामिल थी, जो अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक ईरान के एक संगठित और निरंतर अभियान को रेखांकित करती है। बोल्टन ने खुद पर मंडराते इन खतरों को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था और वे अमेरिकी सरकार की कड़ी सुरक्षा में रह रहे थे। इसी तरह, खुफिया आकलन के आधार पर माइक पोम्पिओ को भी पुख्ता सुरक्षा मुहैया कराई गई थी।
हाल ही में, अमेरिकी युद्ध सचिव (रक्षा मंत्री) पीट हेगसेथ ने पेंटागन की एक ब्रीफिंग में खुलासा किया कि अमेरिकी सेना ने एक ईरानी इकाई के एक वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ एक लक्षित अभियान चलाया था, जिसे ट्रंप और अन्य अमेरिकी अधिकारियों की हत्या के प्रयासों की साजिश रचने का जिम्मा सौंपा गया था।
हालांकि इस सैन्य अभियान के विवरण अभी सीमित हैं, लेकिन हेगसेथ ने उस व्यक्ति को एक प्रमुख ऑपरेटिव बताया जो अमेरिकी राष्ट्रपति और पूर्व अमेरिकी नेताओं को निशाना बनाने वाले बाहरी हमलों की योजना में शामिल था। यह घटनाक्रम ईरान और अमेरिका के बीच महीनों से चल रहे क्षेत्रीय संघर्ष, साइबर गतिविधियों और होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा को लेकर जारी विवादों के कारण पहले से ही चरम पर पहुंचे तनाव के बीच सामने आया है।