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सरकारों और ट्रस्ट को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

शीर्ष अदालत में दायर याचिका पर कार्रवाई प्रारंभ

  • तीन याचिकाएं दायर की गयी हैं

  • तीन जजों की पीठ का नया आदेश

  • एसआईटी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करे

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले दान में गबन के आरोपों की सीबीआई जांच की मांग करने वाली याचिकाओं के एक समूह पर केंद्र सरकार और योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भी नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही, सर्वोच्च न्यायालय ने विशेष जांच दल को अब तक हुए घटनाक्रमों पर एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश दिया।

इससे पहले, राम मंदिर में प्राप्त दान की हेराफेरी के आरोपों के बाद मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को एसआईटी का गठन किया था। तीन याचिकाकर्ताओं में से एक, नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने इस मामले की सीबीआई जांच की मांग को लेकर शीर्ष अदालत का रुख किया था। उन्होंने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, जो राम मंदिर के मामलों का प्रबंधन करता है, के वित्त का भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक द्वारा ऑडिट कराने की भी मांग की है। इसी तरह के उपायों की मांग करते हुए अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव ने दूसरी याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग करने के अलावा, राजद सांसद सुधाकर सिंह द्वारा दायर तीसरी याचिका में मंदिर ट्रस्ट के पूरे वित्त के फॉरेंसिक ऑडिट (न्यायिक ऑडिट) की मांग की गई है।

यह मामला उजागर होने के बाद से ही पूरे देश में इसे लेकर भारी बवाल है। लोग इसे आस्था के साथ खिलवाड़ मान रहे हैं। जांच दल द्वारा कनीय कर्मचारियों की गिरफ्तारी को भी लोगों की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास माना जा रहा है। अनेक लोगों ने इसके लिए सीधे सीधे चंपत राय को जिम्मेदार ठहराया है। जिन्हें तथा अनिल मिश्रा को अब ट्रस्ट से अलग कर दिया गया है।