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ईमानदारी की मिसाल: कांकेर के ग्रामीण ने सड़क पर गिरे 30 हजार रुपये लौटाकर जीता सबका दिल

अक्सर लोग कहते हैं कि ईमानदारी अब सिर्फ किताबों में बची है, लेकिन कांकेर के मालपारा गांव के ग्रामीणों ने इस भरोसे को आज भी जिंदा रखा है। हाल ही में एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने साबित कर दिया कि इंसानियत अभी खत्म नहीं हुई है।

💰 सड़क पर गिरा नोटों का बंडल

ओरछा निवासी महेश कोर्राम अपनी बेटी के स्कूल एडमिशन के लिए बैंक से 30 हजार रुपये निकलवाकर बाइक से घर लौट रहे थे। रास्ते में स्पीड ब्रेकर पर बाइक उछलने से उनकी डिग्गी में रखा बैग सड़क पर गिर गया। थोड़ी देर बाद उसी रास्ते से स्थानीय ग्रामीण मनीष रावते गुजरे, जिन्हें वह बैग मिला। बैग खोलने पर उसमें नकदी के साथ-साथ एक पासबुक भी थी, जिस पर महेश कोर्राम का नाम और पता दर्ज था।

🤝 ग्रामीणों ने दिखाई इंसानियत

मनीष रावते ने बैग मिलने की सूचना अपने मामा उमेश दास को दी, जो केवटी आधार केंद्र के संचालक हैं। उमेश दास ने सूझबूझ दिखाते हुए पते पर संपर्क करने की कोशिश की। बातचीत के दौरान महेश कोर्राम के गांव का ही एक व्यक्ति संपर्क में आया, जिसने महेश कोर्राम की पहचान की। इसके बाद महेश कोर्राम को सूचित किया गया।

महेश जब मनीष रावते और उमेश दास के पास पहुंचे, तो उन्होंने पूरी ईमानदारी के साथ उनके पैसे और कागजात सुरक्षित वापस लौटा दिए। एक गरीब ग्रामीण की इस ईमानदारी की चर्चा पूरे इलाके में हो रही है और लोग इसे मानवता का बड़ा उदाहरण मान रहे हैं।