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सरकार ने 92 लाख अभ्यर्थियों को बाहर कर दिया

राजनीतिक लाभ दिलाने वाली लाड़की बहिन योजना पर बवाल

  • इस मुद्दे पर चुनाव जीता गया था

  • सरकार ने कहा जांच में गड़बड़ी मिली

  • विपक्ष ने कहा अब धोखा दे रहे हैं

राष्ट्रीय खबर

मुंबईः महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों की आहट के बीच राज्य की महायुति (भाजपा-शिवसेना-एनसीपी) सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना को लेकर राज्य का राजनीतिक पारा चरम पर पहुंच गया है। सरकार द्वारा किए गए एक व्यापक और कड़े प्रशासनिक व तकनीकी सत्यापन के बाद करीब 92 लाख आवेदकों को अपात्र पाते हुए लाभार्थी सूची से बाहर कर दिया गया है। इतनी बड़ी संख्या में नामों की छंटनी के बाद उत्तर से लेकर दक्षिण महाराष्ट्र तक राजनीतिक गलियारों में भारी उबाल आ गया है।

सरकारी सूत्रों और महिला व बाल विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह कदम किसी राजनीतिक द्वेष से नहीं, बल्कि पूरी तरह तकनीकी और पारदर्शी जांच के बाद उठाया गया है। जांच के दौरान लाखों आवेदनों में आधार कार्ड, बैंक खाते की जानकारी या आय प्रमाण पत्र स्पष्ट नहीं थे या आपस में मेल नहीं खा रहे थे। कई आवेदकों ने एक से अधिक बार पंजीकरण करा रखा था ताकि योजना का दोहरा लाभ लिया जा सके। आयकर दाता होने या परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख की तय सीमा से अधिक होने के बावजूद कई फॉर्म भरे गए थे। सरकार का रुख स्पष्ट है कि सरकारी धन का सही और पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित करने तथा केवल वास्तविक जरूरतमंद महिलाओं तक सहायता पहुंचाने के लिए यह कड़ा कदम उठाना बेहद अनिवार्य था।

चुनाव के इस मुहाने पर इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं के नाम हटाए जाने को विपक्षी गठबंधन महा विकास अघाड़ी ने एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना लिया है। कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (शरद पवार गुट) के शीर्ष नेताओं ने सरकार को घेरते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। विपक्ष का दावा है कि यह योजना शुरू से ही केवल महिला मतदाताओं को रिझाने और वोट बटोरने का एक चुनावी स्टंट थी। अब जब सरकार पर वित्तीय बोझ बढ़ गया है और बजट की भारी कमी हो गई है, तो तकनीकी कमियों का बहाना बनाकर गरीब और वंचित महिलाओं को उनके हक से दूर किया जा रहा है।

विपक्ष ने इस फैसले को महिलाओं का अपमान बताते हुए सरकार के खिलाफ पूरे राज्य में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और आंदोलन करने की चेतावनी दी है।

विवाद को बढ़ता देख मुख्यमंत्री कार्यालय ने तुरंत इस पर आधिकारिक सफाई जारी की है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन महिलाओं के दस्तावेज पूरी तरह वैध और सही हैं, उन्हें योजना का लाभ बिना किसी रुकावट के मिलता रहेगा। यह छंटनी केवल फर्जीवाड़े और अपात्र लोगों को रोकने के लिए की गई है, और पात्र महिलाओं को पैनिक करने की कोई आवश्यकता नहीं है। बहरहाल, विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उपजे इस बड़े विवाद ने महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों, विशेषकर महिला मतदाता वर्ग के बीच एक नई और तीखी राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। आने वाले चुनावों में यह मुद्दा महायुति और महा विकास अघाड़ी दोनों के भाग्य का फैसला करने में बेहद अहम भूमिका निभाएगा।