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सुपारी तस्करी मामले में ईडी ने नौ स्थानों पर तलाशी ली

म्यांमार की नदी के रास्ते तस्करी का खुलासा

  • फर्जी सीमा शुल्क का खेल उजागर

  • जांच में 970 करोड़ का लेनदेन

  • तियू नदी के रास्ते माल आता

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने म्यांमार से भारत में सूखी सुपारी (बर्मी सुपारी) की बड़े पैमाने पर की जा रही अवैध तस्करी और धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के खिलाफ एक बड़ा अभियान शुरू किया है। इस संगठित सीमा पार नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए ईडी के आइजोल उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने मिजोरम-म्यांमार सीमा पर स्थित चम्फाई कस्बे में नौ विभिन्न स्थानों पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया। यह पूरी कार्रवाई धनशोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 17(1) के तहत लालरेम्पारी, लालहनेमी, संगनेहवेला, थांगखानमुंगा, रोथुआमलुइया, लालरेम्माविया, लालदुआ, जोनुनसांगा और जोसांगपुई जैसे संदिग्धों के आवासीय और व्यावसायिक परिसरों पर की गई है। इस पूरे मामले में 970 करोड़ रुपये से अधिक की अपराध की राशि शामिल है।

इस मामले की शुरुआत गुवाहाटी उच्च न्यायालय द्वारा 16 जुलाई 2024 को एक जनहित याचिका पर दिए गए आदेश के बाद हुई थी। इसके आधार पर इंफाल स्थित सीबीआई की भ्रष्टाचार विरोधी शाखा (एसीबी) ने एक प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की, जिसे आधार बनाकर ईडी ने अपनी जांच शुरू की। इस मामले में आईपीसी की धारा 120बी, 420, 467 और 471 के तहत अनुसूचित अपराध शामिल हैं, जो पीएमएलए के दायरे में आते हैं।

ईडी की जांच में इस तस्करी नेटवर्क के तौर-तरीकों का पर्दाफाश हुआ है। बर्मी नागरिक बिना किसी सीमा शुल्क मंजूरी के तियू नदी के रास्ते सूखी सुपारी भारत लाते थे और सीमा पर स्थानीय दलालों को सौंप देते थे। ये दलाल चम्फाई के गोदामों में माल का भंडारण करते थे और असम-मिजोरम सीमा पर वैरेनगटे तक परिवहन का प्रबंधन करते थे। जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2021 से 2025 के बीच जाली बागान प्रमाणपत्रों और फर्जी सीमा शुल्क दस्तावेजों के सहारे 251.19 करोड़ रुपये (एसजीएसटी) और 86.25 करोड़ रुपये (सीजीएसटी) के फर्जी ई-वे बिल जारी किए गए। बैंक खातों के विश्लेषण से पता चला कि 2013 से 2025 के बीच विभिन्न खातों के माध्यम से 970 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेन-देन हुआ। तलाशी के दौरान ईडी ने संदिग्धों की अचल संपत्तियों के दस्तावेज, व्यावसायिक रिकॉर्ड और डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं।