मुख्यमंत्री सतीशन ने खुद घटनास्थल का निरीक्षण किया
राष्ट्रीय खबर
तिरुअनंतपुरमः केरल सरकार ने वायनाड में निर्माणाधीन मेप्पाडी-कल्लाडी सुरंग परियोजना स्थल पर हुए भीषण भूस्खलन के मामले में दोहरी जांच के आदेश दिए हैं। मंगलवार को हुए इस हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई थी, जबकि पांच अन्य लोग अभी भी लापता हैं।
इस दोहरी जांच के तहत परियोजना स्थल का तकनीकी और कानूनी मूल्यांकन किया जाएगा। साथ ही, इस बात की भी व्यापक समीक्षा की जाएगी कि निर्माण करने वाली ठेकेदार कंपनियों ने केंद्र सरकार द्वारा पर्यावरण मंजूरी देते समय निर्धारित की गई शर्तों और निर्देशों का कड़ाई से पालन किया था या नहीं।
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बुधवार को लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बावजूद मलबे में दबे लोगों की तलाश के लिए खोजी कुत्तों (कैडवेर डॉग्स) और बचाव कर्मियों की मदद से तलाशी अभियान जारी रहा। मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने साप्ताहिक कैबिनेट बैठक के बाद तिरुवनंतपुरम में संवाददाताओं को बताया कि इस हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को 5 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी।
ट्विन-टनल (जुड़वां सुरंग) परियोजना से जुड़ी तीन निर्माण एजेंसियों को बड़ा झटका देते हुए मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि इस ऐतिहासिक सुरंग सड़क का काम तब तक निलंबित रहेगा, जब तक कि जांच रिपोर्ट सौंप नहीं दी जाती और उन्हें मंजूरी नहीं मिल जाती।
मुख्यमंत्री सतीशन ने इस बात पर जोर दिया कि संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र को देखते हुए केंद्र सरकार ने 50 सख्त निर्देशों के साथ इस परियोजना को मंजूरी दी थी। सरकार इस दावे की भी जांच कराएगी, जिसमें दुर्घटनास्थल पर मौजूद इंजीनियरों ने कहा है कि यह त्रासदी नीचे मिट्टी खिसकने से नहीं, बल्कि पहाड़ी के ऊपरी हिस्से में भूस्खलन होने के कारण हुई है।
तलाश अभियान को तेज करने के लिए दुर्घटनास्थल को चार अलग-अलग जोन में बांटा गया है, और नदी के निचले इलाकों में भी खोजबीन की जा रही है। इस हादसे में जान गंवाने वालों में मध्य प्रदेश के ऑपरेटर चंद्रभान, बिहार के सिविल फोरमैन बिकाश कुमार और झारखंड के मजदूर अनमोल शामिल हैं। अनमोल के पार्थिव शरीर को एर्नाकुलम के नेदुमबासेरी हवाई अड्डे से उनके गृह राज्य भेज दिया गया है।
जहां एक तरफ केरल सरकार ने ठेकेदार एजेंसियों पर सुरंग निर्माण के दौरान निकाली गई मिट्टी का एक बड़ा ढेर लगाने का आरोप लगाया है, वहीं दूसरी तरफ मुख्य निर्माण एजेंसी दिलीप बिल्डकॉन ने एक बयान में कहा कि मेप्पाडी-कल्लाडी सुरंग परियोजना का काम सभी नियामक, इंजीनियरिंग और पर्यावरणीय मंजूरियों के अनुपालन में किया जा रहा था। कंपनी के अनुसार, यह घटना एक तीव्र मानसूनी दौर के दौरान हुई, जिसमें 24 घंटों के भीतर 265 मिमी भारी बारिश दर्ज की गई थी, जिसके लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग ने पहले ही चेतावनी जारी की थी।