केंद्र सरकार ने मैसेजिंग ऐप्स में ‘यूजरनेम फीचर’ के सुरक्षा पहलुओं को लेकर जांच का दायरा बढ़ा दिया है। व्हाट्सएप को नोटिस भेजने के बाद, अब इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने टेलीग्राम और सिग्नल से भी जवाब मांगा है। सरकार का मुख्य सवाल यह है कि ये प्लेटफ़ॉर्म यूजरनेम से जुड़ी धोखाधड़ी, किसी और की पहचान का इस्तेमाल (Impersonation) और ऑनलाइन दुर्व्यवहार के जोखिमों को कैसे नियंत्रित कर रहे हैं।
🛡️ क्यों चिंतित है सरकार? सुरक्षा और गोपनीयता का सवाल
सरकार को सबसे बड़ी चिंता इस बात की है कि फोन नंबर छिपाकर यूजरनेम के जरिए चैट करने से स्कैमर्स के लिए मशहूर हस्तियों या सरकारी अधिकारियों का रूप धरना आसान हो जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि इससे फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसे अपराधों में अचानक उछाल आ सकता है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जब तक इस फीचर की सुरक्षा संबंधी समीक्षा और परामर्श (Consultation) प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक इन्हें सुरक्षा मानकों को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
🔍 जांच के दायरे में व्हाट्सएप, टेलीग्राम और सिग्नल
व्हाट्सएप के चीफ कम्पलायंस ऑफिसर को भेजे गए नोटिस में सरकार ने तीन दिन के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है। वहीं, टेलीग्राम से तो सरकार ने यह तक पूछ लिया है कि उसे यह सुविधा जारी रखने की अनुमति क्यों दी जानी चाहिए? चूंकि टेलीग्राम और सिग्नल पहले से ही यूजरनेम आधारित चैटिंग की सुविधा दे रहे हैं, इसलिए सरकार अब इन दोनों की भी कड़ी समीक्षा कर रही है।
⚠️ डिजिटल सुरक्षा बनाम सुविधा
यह विवाद डिजिटल दुनिया में ‘सुविधा’ और ‘सुरक्षा’ के बीच के संतुलन को लेकर है। जहाँ मैसेजिंग ऐप्स इसे यूजर्स की प्राइवेसी बढ़ाने वाला कदम बता रहे हैं, वहीं सरकार इसे साइबर अपराध के लिए एक नए रास्ते के रूप में देख रही है। यह जांच आने वाले समय में भारत में मैसेजिंग ऐप्स के लिए नए सुरक्षा दिशानिर्देशों (Guidelines) को जन्म दे सकती है।