Breaking News in Hindi

Crude Oil Prices: कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का पेट्रोल-डीजल पर असर, सरकार ने साफ की स्थिति

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया है कि 30 जून तक सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर भारी ‘अंडर-रिकवरी’ (लागत से कम कीमत पर बिक्री) का सामना करना पड़ा है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद कंपनियों ने घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए ईंधन कम दरों पर बेचा, जिससे उन्हें 2.19 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

ईंधन की कीमतों में कटौती कब होगी?

कच्चे तेल की कीमतों में पिछले 40 दिनों में 28 फीसदी की गिरावट के बावजूद रिटेल कीमतों में कटौती न होने पर मंत्री ने बताया कि इसका मुख्य कारण ‘टाइम-लैग’ है। उन्होंने समझाया कि पेट्रोल पंपों पर जो ईंधन आज मिल रहा है, उसे बनाने के लिए कच्चा तेल दो महीने पहले खरीदा गया था, जब कीमतें काफी अधिक थीं। 72 डॉलर प्रति बैरल के वर्तमान भाव वाला कच्चा तेल अभी रिफाइनिंग प्रक्रिया में है, जिसका असर कुछ समय बाद पंपों पर दिखेगा। यदि वैश्विक कीमतें लंबे समय तक इसी निचले स्तर पर बनी रहती हैं, तो निश्चित रूप से कीमतों में राहत पर विचार किया जाएगा।

📊 नुकसान का विस्तृत ब्यौरा

मंत्री के अनुसार, ओएमसी की अंडर-रिकवरी का मुख्य भार डीजल पर है। पहली तिमाही (Q1FY27) में नुकसान का आंकड़ा इस प्रकार है:

  • पेट्रोल: 19,905 करोड़ रुपये।

  • डीजल: 1.44 लाख करोड़ रुपये।

  • एलपीजी: 24,148 करोड़ रुपये। पिछली तिमाहियों से एलपीजी पर अतिरिक्त 30,720 करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी भी शामिल है।

🌐 ऊर्जा सुरक्षा और आयात पर निर्भरता

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 90% कच्चा तेल और 60% एलपीजी आयात करता है। हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि पश्चिम एशिया के संकट के बावजूद भारत ने अपनी 24 रिफाइनरियों और मजबूत रिफाइनिंग क्षमता के दम पर स्थिति को कुशलतापूर्वक संभाला है। वर्तमान में भारत के पास लगभग 76-80 दिनों का तेल स्टॉक है, जिसे भविष्य की अनिश्चितताओं को देखते हुए बढ़ाने की आवश्यकता है।