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अल-ओबेद में गहराता भुखमरी का संकट

अर्धसैनिक बलों की सक्रियता से आम नागरिक परेशानी में

  • दो जनरलों की लड़ाई से ऐसी स्थिति बनी

  • चार साल से जारी है यहां का गृहयुद्ध

  • आम नागरिक हो गये हैं इसके शिकार

एजेंसियां

अल ओबेदः सुडान में जारी चार साल से चले आ रहे गृहयुद्ध ने अब एक और भयावह मोड़ ले लिया है। मध्य सुडान के उत्तर कोर्डोफन राज्य की रणनीतिक राजधानी अल-ओबेद के आसपास अर्धसैनिक बलों की बढ़ती सैन्य गतिविधियों और ड्रोन हमलों ने पहले से ही तबाही झेल रहे देश में कैटास्ट्रोफिक यानी विनाशकारी भुखमरी के संकट को और गहरा कर दिया है। विश्व खाद्य कार्यक्रम ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति नहीं सुधरी, तो यह शहर युद्ध का नया केंद्र बन जाएगा, जिससे हिंसा और बड़े पैमाने पर विस्थापन की एक नई लहर पैदा हो सकती है।

वर्तमान में, सुडान की 62 प्रतिशत आबादी—लगभग 2.9 करोड़ लोग—तीव्र खाद्य असुरक्षा का सामना कर रही है। वैश्विक भुखमरी पर नज़र रखने वाली संस्था इंटीग्रेटेड फूड सिक्योरिटी फेज क्लासिफिकेशन ने पहले ही देश के दो हिस्सों में अकाल की पुष्टि कर दी है। अल-ओबेद में, डब्ल्यूएफपी वर्तमान में 1 लाख से अधिक लोगों को सहायता प्रदान कर रहा है, जहाँ घेराबंदी की स्थिति में लोग भोजन, पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। ड्रोन हमलों ने बुनियादी ढाँचों को निशाना बनाया है, जिससे आम नागरिकों का जीवन दूभर हो गया है। एजेंसी अब 2.5 लाख लोगों के लिए राहत सामग्री जुटाने में जुटी है, जिन्हें पलायन के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

संगठन के सुडान कंट्री डायरेक्टर अब्दुल्ला अलवर्दात ने गहरी चिंता जताते हुए कहा कि राहत कार्य जारी रखने के लिए संसाधनों का भारी अभाव है। उन्होंने चेतावनी दी कि सितंबर तक आपातकालीन संचालन के लिए भोजन खत्म हो जाएगा, जबकि अभी भी पांच में से केवल एक ज़रूरतमंद व्यक्ति तक ही सहायता पहुँच पा रही है। रैपिड सपोर्ट फोर्सेज इस शहर पर कब्ज़ा करने के लिए बेताब है, क्योंकि यहाँ एक प्रमुख एयरबेस और इन्फैंट्री डिवीजन स्थित है, और यह दारफुर को खार्तूम से जोड़ने वाला मुख्य मार्ग भी है।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस संकट को लेकर चिंता बढ़ गई है। ब्रिटेन की विदेश सचिव यवेट कूपर ने कहा है कि शहर अत्याचार के मुहाने पर है। हालांकि, येल स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के नथानिएल रेमंड ने ब्रिटिश संसद के सामने चिंता जताई कि ब्रिटेन ने पूर्व में कड़े कदम उठाने में संकोच किया है। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि युद्ध के साथ-साथ अब बारिश और बीमारियाँ भी लोगों की जान की दुश्मन बन रही हैं। बाढ़ और दूषित जल के कारण हैजा और मलेरिया जैसी महामारियाँ फैलने का खतरा है, जो गोलियों से भी ज़्यादा लोगों की जान ले सकती हैं।