अमृतसर: श्री अकाल तख्त साहिब ने पंजाब सरकार द्वारा अप्रैल 2026 में पारित ‘बेअदबी कानून’ में किए गए संशोधनों को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रदेश के 40 सिख विधायकों को स्पष्टीकरण के लिए तलब किया है। जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज के निर्देश पर अकाल तख्त सचिवालय ने इन सभी विधायकों को 29 जून को पेश होने के निर्देश दिए हैं।
📧 नोटिस और सूचना की प्रक्रिया
अकाल तख्त सचिवालय के प्रभारी बगीचा सिंह ने बताया कि इस संबंध में 17 और 18 जून को ही आधिकारिक ई-मेल और व्हाट्सएप के माध्यम से विधायकों व मंत्रियों को सूचित कर दिया गया था। इसके अतिरिक्त, 23 जून को पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह को भी पूरे घटनाक्रम से लिखित में अवगत करा दिया गया है। सचिवालय ने फोन के जरिए भी सभी संबंधित विधायकों को बैठक की जानकारी दी है।
📜 क्यों तलब किए गए विधायक?
अकाल तख्त सचिवालय का मुख्य तर्क है कि बेअदबी कानून में संशोधन करने से पूर्व श्री अकाल तख्त साहिब, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) और गुरु खालसा पंथ से कोई भी राय या परामर्श नहीं लिया गया। सिख संस्थाओं का मानना है कि यह संशोधन पंथ की भावनाओं के विपरीत हो सकते हैं, इसलिए इस विषय को अत्यंत गंभीर माना गया है।
⚖️ गैर-सिख मंत्रियों के लिए भी निर्देश
अकाल तख्त ने केवल सिख विधायकों को ही नहीं, बल्कि पंजाब कैबिनेट के उन मंत्रियों को भी निर्देश दिए हैं जो सिख समुदाय से नहीं हैं। सचिवालय ने कहा है कि ऐसे मंत्रियों को 29 जून से पहले इस पूरे मामले पर अपना ‘लिखित पक्ष’ सचिवालय में जमा करना होगा।
📢 29 जून की बैठक के मायने
यह बैठक पंजाब सरकार और प्रमुख सिख संस्थाओं के बीच बढ़ते मतभेदों को देखते हुए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि क्या यह बैठक बेअदबी कानून में किसी और बड़े बदलाव का आधार बनेगी या सरकार और पंथ के बीच टकराव को बढ़ाएगी।