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चार आईपीएस को मिला डीजी रैंक का इम्पैनलमेंट

बिहार में अब पुलिस रेंज के बदले पुलिस जोन की तैयारी

  • पहले भी बिहार में पुलिस जोन ही था

  • 1995 बैच के अफसरों को वरीयता

  • विधि व्यवस्था में सुधार की कवायद

दीपक नौरंगी

पटनाः बिहार पुलिस महकमे में इन दिनों एक बड़े और व्यापक संगठनात्मक एवं प्रशासनिक पुनर्गठन की सुगबुगाहट तेज है। यह बदलाव न केवल शीर्ष स्तर पर अधिकारियों के चयन तक सीमित है, बल्कि पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली और संरचनात्मक ढांचे में भी आमूलचूल परिवर्तन का संकेत दे रहा है।

हाल ही में केंद्र सरकार ने बिहार कैडर के चार अत्यंत अनुभवी और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों—जगमोहन, आर. मलार विजी, पंकज कुमार दाराद और सुशील खोपड़े को महानिदेशक रैंक में पदोन्नति के लिए इम्पैनलमेंट प्रदान किया है।

प्रशासनिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय इन अधिकारियों की पेशेवर कुशलता और लंबी सेवा अवधि को केंद्र द्वारा दी गई औपचारिक मान्यता है। पंकज कुमार दाराद, जो वर्तमान में विशेष निगरानी इकाई और एटीएस की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध चलाए गए अभियानों में जिस तरह की सख्ती बरती है, उसने महकमे में एक नया अनुशासन स्थापित किया है। वहीं, एसटीएफ के पूर्व एडीजी सुशील खोपड़े का कार्यकाल बिहार में नक्सलवाद के खात्मे के लिए मील का पत्थर माना जाता है। उनकी रणनीति ने ही राज्य को नक्सली हिंसा से काफी हद तक मुक्त करने में सफलता प्राप्त की है।

इन पदोन्नतियों के साथ-साथ केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात अमित कुमार और राज्य पुलिस भर्ती बोर्ड के अध्यक्ष जितेंद्र कुमार की भूमिकाओं को लेकर भी प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में केंद्र सरकार इन्हें देश की सुरक्षा व्यवस्था में कोई महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व सौंप सकती है।

प्रशासनिक बदलावों के दूसरे महत्वपूर्ण पहलू पर बात करें, तो बिहार सरकार राज्य में पुलिस जोन व्यवस्था को पुनः बहाल करने की तैयारी कर रही है। पिछले सात वर्षों से राज्य में पुलिस रेंज व्यवस्था का संचालन हो रहा था, लेकिन अपराध नियंत्रण और विधि-व्यवस्था के दृष्टिकोण से इसके परिणाम उतने प्रभावी नहीं रहे। गृह विभाग के समक्ष प्रस्तुत प्रस्ताव के अनुसार, जोन प्रणाली लागू होने से क्षेत्रीय पुलिसिंग को अधिक अधिकार मिलेंगे। इससे न केवल त्वरित निर्णय लेने की क्षमता बढ़ेगी, बल्कि जिला स्तरीय इकाइयों की राज्य मुख्यालय पर निर्भरता भी कम हो जाएगी।

कुल मिलाकर, राज्य में नए पुलिस महानिदेशक के चयन और संगठनात्मक बदलावों का यह दौर बिहार पुलिस की कार्यक्षमता को नई गति प्रदान करने के उद्देश्य से प्रेरित है। यह स्पष्ट है कि आने वाले हफ्तों में बिहार पुलिस प्रशासन अपने स्वरूप और नेतृत्व दोनों ही स्तरों पर एक नए युग में प्रवेश कर सकता है।