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शिलांग में उच्च स्तरीय बैठक और मणिपुर में अशांति

पूर्वोत्तर में विकास और सुरक्षा का मसला

  • शिलांग में नार्थ ईस्ट काउंसिल की बैठक

  • सभी राज्यों के सीएम भाग ले रहे हैं

  • मणिपुर का माहौल शांत नहीं हो रहा

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटीः केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को मेघालय की राजधानी शिलांग में नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल की 73वीं प्लेनरी बैठक की अध्यक्षता की। इस महत्वपूर्ण सत्र का मुख्य केंद्र विकास 2047 रहा, जिसमें पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों ने भाग लिया। इस बैठक का उद्देश्य क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करना और आत्मनिर्भर भारत के विजन को गति देना है। नेताओं ने पूर्वोत्तर के समग्र विकास के लिए नई परियोजनाओं और रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा की।

इसके विपरीत, मणिपुर में सुरक्षा एजेंसियां उग्रवाद और आपराधिक गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही हैं। सुरक्षा बलों ने एक बड़े ऑपरेशन के दौरान 12 उग्रवादियों को गिरफ्तार किया और भारी मात्रा में एके-सीरीज़ की राइफलें, हैंड ग्रेनेड व गोला-बारूद बरामद किया। हालांकि, कानून-व्यवस्था बनाए रखने की इस प्रक्रिया में राज्य को भारी कीमत भी चुकानी पड़ी है। थौबल जिले में एक एंटी-ड्रग ऑपरेशन के दौरान पुलिस कमांडो हेड कांस्टेबल खोइरोम सुरेश की चाकू मारकर हत्या कर दी गई, जिसके बाद दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है।

तनाव के बीच, ऑल नागा स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने 13 मई को अपहृत छह नागा बंधकों की सुरक्षित रिहाई के लिए उखरूल से इम्फाल तक विरोध मार्च शुरू किया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि घटना के इतने दिनों बाद भी सरकार और संबंधित अधिकारी बंधकों की स्थिति के बारे में कोई ठोस जानकारी देने में विफल रहे हैं। नागा समुदाय ने चेतावनी दी है कि यदि रिहाई के प्रयासों में तेजी नहीं आई, तो इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं।

पूर्वोत्तर का यह वर्तमान परिदृश्य स्पष्ट करता है कि जहां सरकार आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध है, वहीं क्षेत्र की आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।