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कई दिनों तक समीक्षा के बाद ट्रंप ने सख्त शर्तें रखी

समीक्षा के लिए नया प्रस्ताव ईरान को भेजा

  • कई दिन विचार के बाद फैसला
  • होर्मुज और परमाणु संवर्धन की शर्त
  • अपनी शर्तों को कड़ाई से लागू करेंगे

एजेंसियां

वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी युद्ध को समाप्त करने के उद्देश्य से तैयार किए गए एक प्रस्तावित शांति समझौते के मसौदे में बड़े बदलावों की मांग की है। ट्रंप ने समझौते के प्रारूप में अधिक सख्त शर्तें जोड़ने की बात कहते हुए इस संशोधित रूपरेखा को दोबारा विचार करने के लिए ईरान भेज दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति के इस अप्रत्याशित कदम से दोनों देशों के बीच अंतिम शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने में कुछ दिनों का और विलंब हो सकता है।

हालांकि, संशोधित प्रस्ताव में किए गए बदलावों की सटीक प्रकृति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी है, लेकिन समाचार वेबसाइट एक्सियोस ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि राष्ट्रपति ट्रंप उन प्रावधानों को और अधिक मजबूत करना चाहते हैं जिन्हें वे व्यक्तिगत रूप से देश की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानते हैं। इनमें विशेष रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसकी परमाणु सामग्रियों के प्रबंधन से जुड़े सख्त नियम शामिल हैं।

व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में शुक्रवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के साथ हुई करीब दो घंटे की एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद भी ट्रंप ने इस समझौते पर अंतिम मुहर नहीं लगाई। प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, ट्रंप केवल उसी समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे जो उनकी रेड लाइन्स को संतुष्ट करेगा और ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर स्थायी रूप से लगाम लगाएगा।

इस शांति वार्ता से जुड़े सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच पहले एक अस्थायी सहमति बनी थी, जिसके तहत 60 दिनों के लिए संघर्षविराम बढ़ाने और इस अवधि में ईरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम व क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों पर आगे की बातचीत करने का प्रावधान था। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया है कि किसी भी स्थायी समझौते के लिए दो शर्तें अनिवार्य हैं:  ईरान को यह लिखित गारंटी देनी होगी कि वह कभी भी परमाणु हथियार या बम विकसित नहीं करेगा।

रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए तुरंत पूरी तरह से खोला जाए, जहां से दुनिया के कुल तेल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। इस मार्ग से समुद्री बारूदी सुरंगें हटाई जाएं।  दूसरी ओर, ईरान इस समझौते के बदले विदेशों में जब्त की गई अपनी 25 बिलियन डॉलर की संपत्ति को बहाल करने और लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के खिलाफ इजराइली हमलों पर रोक लगाने की मांग कर रहा है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने भी स्पष्ट किया है कि समझौता अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है।