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स्वर्णकांता के बदले जस्टिस मनोज जैन करेंगे सुनवाई

दिल्ली आबकारी मामले में हाईकोर्ट जांच की गाड़ी आगे बढ़ी

  • अवमानना का मामला भी साथ में जुड़ा

  • राजनीतिक विवाद के केंद्र में है मुद्दा

  • निष्पक्षता पर संदेह का आरोप लगा है

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस मनोज जैन आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और कथित शराब नीति घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में बरी किए गए अन्य सभी आरोपियों के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की याचिका पर सुनवाई करेंगे। यह बदलाव तब हुआ जब पहले इस मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने इसे दूसरी बेंच को ट्रांसफर करने का निर्देश दिया।

जस्टिस शर्मा ने यह कदम अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, विनय मिश्रा, दुर्गेश पाठक और सौरभ भारद्वाज के खिलाफ अवमानना (कंटेंप्ट) की कार्यवाही शुरू करने के बाद उठाया। अवमानना का यह मामला जस्टिस नवीन चावला की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच के समक्ष सूचीबद्ध किया गया है।

अदालत की अवमानना की यह कार्रवाई तब शुरू की गई जब जस्टिस शर्मा ने केस से हटने (रिक्यूजल) की कार्यवाही के संबंध में प्रतिवादियों द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए विभिन्न पोस्ट और वीडियो का संज्ञान लिया। इससे पहले, उन्होंने केजरीवाल और अन्य आरोपियों द्वारा दायर उन याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जिनमें उन्होंने जस्टिस शर्मा से इस मामले की सुनवाई से अलग होने की मांग की थी।

27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और के. कविता सहित सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया था। उस समय ट्रायल कोर्ट ने मामले में सीबीआई की जांच की भी कड़ी आलोचना की थी। गौर करने वाली बात यह है कि यह मामला राजनीतिक रूप से काफी विवादास्पद रहा है; केजरीवाल को 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान गिरफ्तार कर हिरासत में लिया गया था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 156 दिनों की हिरासत के बाद जमानत दी थी। इसी मामले में आप नेता मनीष सिसोदिया को भी 530 दिन हिरासत में बिताने पड़े थे।

ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ सीबीआई की पुनरीक्षण (रिवीजन) याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस शर्मा ने 9 मार्च को प्रथम दृष्टया पाया था कि निचली अदालत की टिप्पणियां त्रुटिपूर्ण थीं। इसके बाद, केजरीवाल और सिसोदिया सहित कुछ अन्य आरोपियों ने पक्षपात की आशंका जताते हुए जस्टिस शर्मा से मामले से हटने का अनुरोध किया था।

जब जस्टिस शर्मा ने इन आवेदनों को खारिज कर दिया और खुद सुनवाई करने का फैसला किया, तो केजरीवाल और सिसोदिया ने उन्हें पत्र लिखकर सूचित किया कि वे उनकी अदालत में होने वाली सुनवाई का बहिष्कार कर रहे हैं और न तो व्यक्तिगत रूप से और न ही अपने वकील के माध्यम से पेश होंगे।

इसके बाद सोशल मीडिया पर चले अभियान को अदालत को बदनाम करने की कोशिश मानते हुए जज ने अवमानना की कार्यवाही शुरू की और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए मुख्य मामले को दूसरी बेंच को सौंपने का निर्देश दिया, जिसके बाद अब जस्टिस मनोज जैन इस मामले को आगे सुनेंगे।