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सब कहानी सामने आने के बाद भी अड़ी है जस्टिस स्वर्णकांता

सीबीआई की याचिका पर ग्यारह को सुनवाई

  • निचली अदालत ने कहा सबूत नहीं

  • सीबीआई की अपील को तुरंत स्वीकार

  • पहले दस्तावेजों की जांच तक नहीं की

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने कथित शराब नीति घोटाले से संबंधित एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ पर सुनवाई स्थगित कर दी। यह मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दायर उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है जिसके तहत आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेताओं—मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और विधायक दुर्गेश पाठक को आरोपमुक्त कर दिया गया था।

अदालत ने स्पष्ट किया कि सुनवाई टालने का मुख्य कारण अरविंद केजरीवाल और अन्य नेताओं का पक्ष रखने के लिए कुछ वरिष्ठ वकीलों की औपचारिक सहमति का इंतजार करना है। कानूनी प्रक्रिया की शुचिता और अभियुक्तों को उचित प्रतिनिधित्व का अवसर देने के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए, अदालत ने फिलहाल किसी भी पक्ष को सुनने से पहले वकीलों की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करने का निर्णय लिया है।

इस मामले की अध्यक्षता कर रही न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने सुनवाई के दौरान आगामी समय सारिणी भी स्पष्ट कर दी है। 11 मई को वरिष्ठ वकीलों की नियुक्ति और उनकी सहमति के संबंध में अदालत आवश्यक औपचारिक आदेश पारित करेगी। 12 मई को इस बहुचर्चित मामले के कानूनी पहलुओं और सीबीआई की दलीलों पर विस्तृत सुनवाई शुरू की जाएगी।

सीबीआई की यह याचिका दिल्ली की राजनीति में एक नया उबाल लेकर आई है। गौरतलब है कि ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव या अन्य कानूनी आधारों पर आप नेताओं को राहत दी थी, जिसे जांच एजेंसी ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। यदि उच्च न्यायालय ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलटता है, तो इन नेताओं के लिए कानूनी मुश्किलें फिर से बढ़ सकती हैं। वर्तमान में, दिल्ली के राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ कानूनी विशेषज्ञों की नजरें भी 12 मई को होने वाली विस्तृत सुनवाई पर टिकी हैं।