बाइस साल के बाद फिर से एक हत्याकांड की चर्चा होने लगी
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कवयित्री मधुमिता शुक्ला की 2003 में हुई सनसनीखेज हत्या के मामले में एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने इस मामले के दोषियों में से एक, रोहित चतुर्वेदी को समय से पहले रिहा करने का आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा चतुर्वेदी की समय पूर्व रिहाई की याचिका को खारिज करने का निर्णय मनमाना, बिना सोचे-समझे लिया गया और कानून व योग्यता के आधार पर टिकने योग्य नहीं था।
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भूयान की पीठ ने केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 9 जुलाई, 2025 को जारी उस पत्र को पूरी तरह से रद्द कर दिया, जिसमें मंत्रालय ने 22 साल से अधिक की जेल काट चुके चतुर्वेदी की रिहाई के लिए उत्तराखंड सरकार द्वारा भेजी गई सिफारिश को मानने से इनकार कर दिया था।
सर्वोच्च अदालत ने गृह मंत्रालय के रवैये पर टिप्पणी करते हुए कहा, यह स्पष्ट है कि मंत्रालय का यह पत्र पहली नजर में ही बिना किसी ठोस कारण के जारी किया गया था, क्योंकि इसमें सक्षम प्राधिकारी द्वारा लिए गए निर्णय का कोई कारण ही नहीं बताया गया है। कारणों को दर्ज करना केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह मनमानेपन के खिलाफ एक सुरक्षा कवच है जो निर्णय लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है।
शीर्ष अदालत ने रेखांकित किया कि गृह मंत्रालय के आदेश में केवल यह कह दिया गया था कि वह उत्तराखंड सरकार के प्रस्ताव से सहमत नहीं है, लेकिन इस असहमति का कोई ठोस आधार या कारण स्पष्ट नहीं किया गया। जस्टिस नागरत्ना की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि इस आदेश में याचिकाकर्ता के जेल के आचरण, लागू होने वाली छूट नीति या याचिकाकर्ता के खिलाफ किसी भी विशिष्ट प्रतिकूल सामग्री पर कोई चर्चा नहीं की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने जोर देकर कहा कि सजा में छूट (रेमिशन) की अवधारणा सजा के सुधारात्मक सिद्धांत से जुड़ी हुई है। अदालत ने भावुक और तार्किक रुख अपनाते हुए कहा कि न्याय किसी व्यक्ति को उसके जीवन के सबसे बुरे कृत्य की छाया में हमेशा के लिए जेल की सलाखों के पीछे रखने की इजाजत नहीं देता।
उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी, उनकी पत्नी मधुमणि त्रिपाठी, भतीजे रोहित चतुर्वेदी और शूटर संतोष राय को 2007 में देहरादून की एक अदालत ने कवयित्री मधुमिता शुक्ला की हत्या के लिए दोषी ठहराया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस मामले की सुनवाई को उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड स्थानांतरित किया गया था। इस मामले में सजा में छूट देने के लिए उपयुक्त सरकार कौन सी है, इस कानूनी सवाल पर लंबे समय तक अदालती कार्यवाही चली थी।