Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Fingernail Lunula Meaning: नाखूनों पर बने सफेद अर्धचंद्र से जानें अपना भविष्य और भाग्य प्रेगनेंसी में जरूरी पोषण: स्वस्थ मां और बेबी के लिए डाइट में शामिल करें ये 7 सुपरफूड्स केन्या का विलवणीकरण प्लांट का वन्यजीवन में सहयोग ओल्ड राजेंद्र नगर कोचिंग हादसा: CBI ने दाखिल की क्लोजर रिपोर्ट, MCD अधिकारियों को मिली बड़ी राहत Lucknow-Kanpur Expressway: आम जनता के लिए खुला 6-लेन एक्सप्रेस-वे, 120 किमी की रफ्तार से दौड़ेगी गाड़... Ghazipur Crime News: जेवर और पैसों के विवाद में दादी बनी कातिल, मासूम पोते की गला दबाकर हत्या महाकाल मंदिर: सावन और भादौ मास में बदली आरती दर्शन की व्यवस्था, अब और अधिक श्रद्धालु कर सकेंगे दर्शन सिंहस्थ 2028 की तैयारी: रेलवे पटरी पर हादसों को रोकने के लिए बिछाया जा रहा सुरक्षा घेरा मंदसौर हाईवे हादसा: टैंकर पलटने से फसलें जलकर राख, मुआवजे की मांग को लेकर किसानों का प्रदर्शन Indore-Ratlam Fourlane Accident: बिलपांक टोल के पास कार डिवाइडर से टकराई, बाल चिकित्सक समेत दो की जा...

पुतिन के समझौता प्रस्ताव में उल्लेखित नाम को नकारा गया

यूरोपीय संघ के मंत्रियों ने गेरहार्ड को किया खारिज

एजेंसियां

बर्लिनः यूरोपीय देशों की सरकारों ने सोमवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के उस सुझाव को पूरी तरह से खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने जर्मनी के पूर्व चांसलर गेरहार्ड श्रोएडर को भविष्य की सुरक्षा वार्ताओं में यूरोप के प्रतिनिधि के रूप में देखने की इच्छा जताई थी। ब्रुसेल्स में आयोजित एक बैठक के दौरान यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों ने स्पष्ट किया कि श्रोएडर की पुतिन के साथ निकटता और रूसी सरकारी कंपनियों के साथ उनके पुराने जुड़ाव के कारण उन्हें एक निष्पक्ष वार्ताकार नहीं माना जा सकता।

राष्ट्रपति पुतिन ने शनिवार को दावा किया था कि यूक्रेन युद्ध अपने अंत की ओर बढ़ रहा है और वे यूरोप के लिए नई सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा करने को तैयार हैं। उन्होंने गेरहार्ड श्रोएडर को इस बातचीत के लिए अपना पसंदीदा भागीदार बताया था। इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख कजा कल्लास ने कहा, यह स्पष्ट है कि पुतिन उन्हें क्यों चुनना चाहते हैं—ताकि वास्तव में वे मेज के दोनों ओर खुद ही बैठे हों। उन्होंने आगे कहा कि अगर हम रूस को अपनी ओर से वार्ताकार नियुक्त करने का अधिकार देते हैं, तो यह कतई बुद्धिमानी नहीं होगी। कल्लास ने जोर देकर कहा कि फिलहाल ऐसे कोई संकेत नहीं हैं कि रूस नेक नियति के साथ बातचीत के लिए तैयार है।

जर्मनी के यूरोप मंत्री गुंथर क्रिचबौम ने भी श्रोएडर की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि पूर्व चांसलर (1998-2005) के पास एक ईमानदार मध्यस्थ बनने के लिए आवश्यक साख नहीं है। क्रिचबौम के अनुसार, श्रोएडर लंबे समय से पुतिन के प्रभाव में रहे हैं, जो उन्हें एक विश्वसनीय यूरोपीय प्रतिनिधि बनने से रोकता है। यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने भी इस विचार को सिरे से नकार दिया, हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि यूरोप ऐसी वार्ताओं का हिस्सा बन सकता है जो अमेरिका के नेतृत्व में चल रहे शांति प्रयासों की पूरक हों।

यूरोपीय संघ के मंत्रियों का मानना है कि किसी भी बातचीत से पहले यूरोपीय देशों को आपस में इस बात पर सहमत होना होगा कि वे इन वार्ताओं से क्या हासिल करना चाहते हैं। ब्रुसेल्स में हुई इस चर्चा से यह साफ हो गया है कि यूरोप अब रूस के डिवाइड एंड रूल (बांटो और राज करो) के जाल में फंसने को तैयार नहीं है। कजा कल्लास, जो स्वयं एस्टोनिया की पूर्व प्रधानमंत्री रही हैं, ने विश्वास जताया कि वे रूस द्वारा बिछाए गए कूटनीतिक जाल को समझने और उससे निपटने में सक्षम हैं। वर्तमान में, यूरोपीय संघ रूस की ईमानदारी पर संदेह कर रहा है और किसी भी औपचारिक वार्ता से पहले जमीनी स्तर पर ठोस बदलाव की उम्मीद रखता है।