विजय ने जुटा लिये आवश्यक समर्थन
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शपथग्रहण की तैयारी में जुटा राजभवन
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सत्ता का नया गणित और गठबंधन
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डीएमके और कांग्रेस के रिश्तों में दरार
राष्ट्रीय खबर
चेन्नईः तमिलनाडु का राजभवन लगातार सबसे बड़े दल के तौर पर उभरे टीवीके के विजय को मुख्यमंत्री बनाने के रास्ते में अड़ंगे डाल रहा था। इसके बीच भाजपा की यह कोशिश थी कि डीएमके और एआईएडीएमके मिलकर भी सरकार बनाने का दावा पेश कर दें। इस खेल का अंत तब हुआ जबकि विजय की टीवीके ने सदन में बहुमत के लिए आवश्यक विधायक जुटा लिये हैं। इससे अब सरकार गठन का रास्ता साफ हो गया है।
तमिलनाडु की राजनीति में साल 2026 एक ऐतिहासिक मोड़ लेकर आया है, जहाँ दशकों पुराने द्रविड़ किलों को भेदते हुए एक नई राजनीतिक शक्ति उदय हो रही है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में सरकार गठन को लेकर जारी अनिश्चितता अब समाप्त होती दिख रही है। अभिनेता से राजनेता बने सी. जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कज़गम को अब विदुथलाई चिरुथैगल कच्ची और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग का निर्णायक समर्थन प्राप्त हो गया है।
हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में टीवीके ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 108 सीटें अपने नाम की थीं। हालांकि, यह आंकड़ा 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए आवश्यक 119 सीटों से थोड़ा दूर था। इस कमी को पूरा करने के लिए चले राजनीतिक घटनाक्रम में वीसीके (दो सीटें) के नेता थोल थिरुमावलवन ने विजय के नेतृत्व वाली सरकार को अपना समर्थन पत्र सौंप दिया है। टीवीके के प्रमुख रणनीतिकार आधव अर्जुना ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि इस समर्थन के साथ ही जोसेफ विजय का मुख्यमंत्री बनने का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो गया है।
इस गठबंधन की खास बात यह है कि इसमें कांग्रेस, सीपीआई और सीपीआई-एम जैसे दल भी शामिल हैं। इन दलों के सहयोग से अब यह नया विजय गठबंधन बहुमत के जादुई आंकड़े को आसानी से पार कर चुका है, जिससे राज्य में पहली बार एक बड़े गठबंधन की मिली-जुली सरकार बनने जा रही है।
इस पूरे सत्ता संघर्ष के बीच सबसे चौंकाने वाला पहलू डीएमके और कांग्रेस के बीच दशकों पुराने गठबंधन का टूटना रहा। पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके प्रमुख एम.के. स्टालिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी नाराजगी और विवशता दोनों व्यक्त की। उन्होंने खुलासा किया कि कांग्रेस के नवनिर्वाचित विधायक जीत के बाद पारंपरिक शिष्टाचार के नाते डीएमके मुख्यालय अन्ना अरिवालायम तक नहीं आए। स्टालिन के अनुसार, कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर डीएमके से अपने रिश्ते तोड़ लिए हैं और टीवीके के पाले में चली गई है।
हालांकि, स्टालिन ने यह भी कहा कि वे वर्तमान राजनीतिक संकट को टालने के लिए अपने पूर्व सहयोगियों द्वारा टीवीके को समर्थन देने के फैसले का विरोध नहीं करेंगे, लेकिन डीएमके अपने धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन की मूल विचारधारा पर अडिग रहेगी और विपक्ष की भूमिका निभाएगी।
राज्य में जारी इस भारी राजनीतिक गहमागहमी के बीच प्रशासनिक हलचल भी तेज है। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर का कार्यक्रम भी इस बदलाव की गवाह बन रहा है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, राज्यपाल 9 मई, 2026 की शाम 7:10 बजे चेन्नई से तिरुवनंतपुरम के लिए रवाना होंगे। माना जा रहा है कि इस प्रस्थान से पहले या तुरंत बाद, जोसेफ विजय राजभवन जाकर सरकार बनाने का औपचारिक दावा पेश करेंगे। तमिलनाडु की जनता अब अपने प्रिय अभिनेता थलपति विजय को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर देखने के लिए उत्सुक है। यह सरकार न केवल नई होगी, बल्कि इसमें क्षेत्रीय दलों और राष्ट्रीय दलों का एक ऐसा अनूठा मेल होगा, जो आने वाले समय में तमिलनाडु की शासन व्यवस्था और राजनीति की दिशा तय करेगा।