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ट्रंप के संदेश को समझ गया है यूरोपः नाटो प्रमुख

अमेरिकी राष्ट्रपति की यूरोप पर नाराजगी के बाद प्रतिक्रिया

एजेंसियां

बर्लिनः नाटो के महासचिव मार्क रुटे ने कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जर्मनी से 5,000 सैनिकों को वापस बुलाने की योजना की घोषणा के बाद यूरोपीय नेताओं को स्पष्ट संदेश मिल गया है। ट्रंप लंबे समय से नाटो सहयोगियों से इस बात पर नाराजगी जताते रहे हैं कि वे अपनी रक्षा और रणनीतिक जिम्मेदारियों में अमेरिका का पर्याप्त साथ नहीं दे रहे हैं। सोमवार को आर्मेनिया में यूरोपीय राजनीतिक समुदाय की बैठक से पहले रुटे ने स्वीकार किया कि अमेरिकी पक्ष में काफी निराशा है, जिसे अब यूरोप गंभीरता से ले रहा है।

रुटे ने जोर देकर कहा कि यूरोपीय देश अब अपनी भूमिका बढ़ाने और नाटो को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में कदम उठा रहे हैं। यह घटनाक्रम तब तेज हुआ जब पेंटागन ने शुक्रवार को जर्मनी से सैनिकों की वापसी की पुष्टि की। यह घोषणा जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ के उस बयान के कुछ दिनों बाद आई, जिसमें उन्होंने ईरान के साथ युद्ध को समाप्त करने के लिए चल रही वार्ताओं के दौरान अमेरिका की स्थिति पर टिप्पणी की थी। वहीं, यूरोपीय संघ की शीर्ष राजनयिक काजा क्लास ने सैनिकों की वापसी के समय पर हैरानी जताई है।

काजा क्लास ने कहा कि यह फैसला दर्शाता है कि अब यूरोप को नाटो के भीतर अपने स्तंभ को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी सैनिक यूरोप में केवल यूरोपीय हितों की रक्षा के लिए नहीं, बल्कि अमेरिकी हितों की सुरक्षा के लिए भी तैनात हैं। इस बीच, नाटो की प्रवक्ता एलिसन हार्ट ने बताया कि गठबंधन के अधिकारी अमेरिकी निर्णय के विवरण को समझने के लिए वाशिंगटन के साथ संपर्क में हैं।

ईरान के साथ जारी युद्ध और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बाधित होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है, जिससे यूरोपीय देशों की चिंता और आलोचना बढ़ गई है। पिछले सप्ताह चांसलर मर्ज़ ने इस युद्ध की तुलना इराक और अफगानिस्तान जैसे पिछले सैन्य संकटों से की थी। वर्तमान परिस्थितियों में अमेरिका का यह सख्त रुख यूरोप को अपनी रक्षा नीतियों में आत्मनिर्भर बनने और रक्षा खर्च बढ़ाने के लिए मजबूर कर रहा है।