सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामला के बीच चर्चा तेज
कल के बयान के बाद मामला उभरा
हाईकोर्टों ने भी कई आदेश दिये हैं
अलग अलग मामलों में ऐसा आदेश
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह चुनाव आयोग के सभी फैसलों की जांच करेगा और कानून के अनुकूल न पाए जाने पर उन्हें रद्द कर देगा। शीर्ष अदालत ने केंद्र और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि शीर्ष चुनाव निकाय ने दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बिना कई फैसले लिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा वी. मोहना की पीठ ने कहा, हम सभी फैसलों की जांच करेंगे। यदि कोई फैसला कानून के अनुसार नहीं है, तो हम उसे रद्द कर देंगे। हालांकि, अदालत ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेंद्र कुमार को अंतिम फैसले तक कोई भी निर्णय लेने से रोकने के लिए कोई अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया।
1971 के लोकसभा चुनाव में रायबरेली से इंदिरा गांधी की जीत को उनके प्रतिद्वंद्वी राजनारायण ने चुनौती दी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 जून 1975 को इंदिरा गांधी का चुनाव रद्द कर दिया था और उन पर छह साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी थी, जिसके बाद देश में आपातकाल की घोषणा की गई थी। 1977 के केरल विधानसभा चुनावों के दौरान सांप्रदायिक प्रचार के आरोपों के बाद, हाईकोर्ट ने दोनों मंत्रियों के चुनाव को रद्द कर दिया था। हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया।
1982 के केरल चुनाव में उत्तर परवूर निर्वाचन क्षेत्र के 50 मतदान केंद्रों पर पहली बार ईवीएम का इस्तेमाल किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने 1984 में फैसला सुनाया कि ईवीएम के इस्तेमाल का कोई कानूनी प्रावधान नहीं था, पिलाई का चुनाव रद्द कर दिया और बैलेट पेपर से दोबारा चुनाव का आदेश दिया। 2006 के केरल विधानसभा चुनाव में एलडीएफ उम्मीदवार एम.जे. जैकोब की जीत को केरल हाईकोर्ट ने चरित्र हनन वाले पर्चे बांटने के आरोपों के कारण रद्द कर दिया था, हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी।
केरल हाईकोर्ट ने 2016 के विधानसभा चुनाव में आईयूएमएल के विधायक के.एम. शाजी की जीत को धार्मिक भावनाओं के दुरुपयोग के आरोप में रद्द कर दिया था और छह साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अयोग्यता पर अंतरिम रोक लगा दी थी। मद्रास हाईकोर्ट ने जुलाई 2023 में थेनी निर्वाचन क्षेत्र से एआईएडीएमके सांसद ओ.पी. रवींद्रनाथ कुमार की 2019 की चुनावी जीत को अमान्य घोषित कर दिया था, क्योंकि उन्होंने नामांकन पत्रों में संपत्ति की जानकारी छिपाई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले पर रोक लगा दी थी।