प्राकृतिक आपदा में अब तक 18 लोगों की मौत
एजेंसियां
नैरोबीः पूर्वी अफ्रीकी देश केन्या इन दिनों भीषण प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों में मूसलाधार बारिश के बाद आई बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में कम से कम 18 लोगों की जान चली गई है। रविवार को पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, मध्य और पूर्वी क्षेत्रों के थराका निथी, एल्गेयो-मारकवेट और कियाम्बू काउंटियों में बड़े पैमाने पर भूस्खलन की खबरें मिली हैं। पुलिस ने इन 18 मौतों की पुष्टि करते हुए नागरिकों से खराब मौसम के बीच अत्यधिक सावधानी बरतने की अपील की है।
अधिकारियों ने बताया कि मिट्टी धंसने और कीचड़ के बहाव (मडस्लाइड्स) ने कई परिवारों को सीधे तौर पर प्रभावित किया है। इससे न केवल सैकड़ों घर विस्थापित हुए हैं, बल्कि संपत्ति और बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुँचा है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि जो लोग भूस्खलन की आशंका वाले या बाढ़ प्रभावित निचले इलाकों में रह रहे हैं, वे तुरंत सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं। हालांकि, विस्थापितों की कुल संख्या का अभी सटीक आकलन नहीं हो पाया है, लेकिन नुकसान का दायरा काफी बड़ा बताया जा रहा है।
राजधानी नैरोबी की स्थिति भी चिंताजनक है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शहर की सड़कें दरिया बन चुकी हैं और गाड़ियाँ व पैदल यात्री पानी के तेज बहाव के बीच से गुजरने को मजबूर हैं। बुनियादी सुविधाओं की बदहाली को लेकर जनता में रोष है। रविवार को नैरोबी के माकोंगेनी और रुआई इलाकों के व्यापारियों ने सड़कों की जर्जर स्थिति के विरोध में प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि बारिश और जलजमाव के कारण उनके व्यापार पूरी तरह ठप हो गए हैं।
मौसम विभाग ने पहले ही चेतावनी दी थी कि लगातार हो रही बारिश से जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। साथ ही, देश भर में खड़ी फसलों और कृषि भूमि के नष्ट होने की भी संभावना है, जिससे भविष्य में खाद्य संकट गहरा सकता है। गौरतलब है कि पिछले दो महीनों में केन्या में बाढ़ का यह दूसरा घातक दौर है; मार्च में भी नैरोबी में आई बाढ़ ने 37 लोगों की जान ले ली थी। विशेषज्ञों का मानना है कि हालांकि केन्या में मार्च से मई तक वर्षा ऋतु रहती है, लेकिन मानव-जनित जलवायु परिवर्तन इन मौसमी परिस्थितियों को और अधिक विनाशकारी बना रहा है।