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अमेरिकी प्रतिबंधों की अवहेलना से टकराव की स्थिति

काफी दिनों की चुप्पी के बाद अब चीन ने अपने तेवर दिखाये

एजेंसियां

बीजिंगः  वैश्विक आर्थिक संबंधों में एक अभूतपूर्व और तनावपूर्ण मोड़ लेते हुए, चीन ने पहली बार अपनी कंपनियों को अमेरिकी प्रतिबंधों की अवहेलना करने का आधिकारिक आदेश दिया है। यह निर्णय दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच एक वाटरशेड मोमेंट (ऐतिहासिक मोड़) माना जा रहा है।

चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने एक निषेध आदेश जारी कर चीनी संस्थाओं को ईरान के साथ पेट्रोलियम लेनदेन में शामिल होने के आरोप में पांच चीनी कंपनियों पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों को मानने से इनकार करने का निर्देश दिया है। यह कदम चीन के बैंकिंग क्षेत्र को सीधे तौर पर वाशिंगटन और बीजिंग के बीच चल रहे कूटनीतिक युद्ध के केंद्र में ले आया है।

चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने अपने 2021 के ब्लॉकिंग रूल्स और राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिकी उपाय अनुचित और अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रतिकूल हैं। यह पहली बार है जब बीजिंग ने अपने ब्लॉकिंग कानून का इस तरह से कड़ाई से उपयोग किया है। जिन पांच कंपनियों को अमेरिकी स्पेशली डेजिग्नेटेड नेशंस सूची में डाला गया था, उनमें हेंगली पेट्रोकेमिकल (डालियान) रिफाइनिंग कंपनी और शेडोंग शौगुआंग लुकिंग पेट्रोकेमिकल जैसी प्रमुख रिफाइनरियां शामिल हैं। अमेरिका का आरोप है कि ये रिफाइनरियां ईरान से अरबों डॉलर का तेल खरीदकर तेहरान के परमाणु कार्यक्रमों और क्षेत्रीय आक्रामकता को बढ़ावा दे रही हैं।

इससे पहले के वर्षों में, चीन आधिकारिक तौर पर एकपक्षीय प्रतिबंधों का विरोध तो करता था, लेकिन उसकी कंपनियां अमेरिकी वित्तीय प्रणाली तक अपनी पहुंच बनाए रखने और आर्थिक झटकों से बचने के लिए चुपचाप इन प्रतिबंधों का पालन करती थीं। हालांकि, अब बीजिंग ने अपनी रणनीति बदल दी है। चीन का कहना है कि यह आदेश राष्ट्रीय संप्रभुता, सुरक्षा और विकास हितों की रक्षा के लिए आवश्यक है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि जो बैंक इन प्रतिबंधित रिफाइनरियों के साथ व्यापार जारी रखेंगे, उन्हें भी गंभीर प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति वैश्विक बैंकिंग प्रणालियों के लिए एक दुविधा पैदा कर सकती है। यदि चीनी बैंक बीजिंग के आदेश का पालन करते हैं, तो उन्हें डॉलर-आधारित अंतरराष्ट्रीय लेनदेन से बाहर किए जाने का जोखिम होगा। वहीं, यदि वे अमेरिकी प्रतिबंधों का पालन करते हैं, तो उन्हें चीन के घरेलू कानूनों के उल्लंघन के लिए भारी दंड झेलना पड़ सकता है।

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने इन प्रतिबंधों को आर्थिक रोष करार दिया है, जिसका उद्देश्य ईरान की वित्तीय जीवन रेखा को काटना है। दूसरी ओर, चीन ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी कंपनियों के वैध अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और विदेशी कानूनों के किसी भी अनुचित अनुप्रयोग की बारीकी से निगरानी करना जारी रखेगा। यह टकराव न केवल तेल बाजार को प्रभावित कर सकता है, बल्कि आने वाले समय में वैश्विक वित्तीय स्थिरता के लिए भी एक बड़ी चुनौती पेश कर सकता है।